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Tuesday, 1 November 2011

अन्ना हजारेको खुल्ला पत्र


From : www.vkvora2001.blogspot.com
to : http://www.annahazaresays.wordpress.com
सेवामें
मामनिय श्री अन्ना हजारेजी,
http://www.annahazaresays.wordpress.com
आपके ब्लोग पर कई दिनोसे लिखनेका सोच रहा था। फिर लीन्क मुश्किल हो गयी ओर आज लिन्क मिल गई.
प्रधानमंत्रीको आपने ३१.१०.२०१०को फिरसे पत्र लिखा है ओर अपना आंदोलन जोरसे करनेको लिखा है.
क्ऱुपया ध्यान रखें कि स्वतंत्राके बाद हिन्दु कोड या सिविल कोडके बारेमें जोरोसे चर्चा चली. कुछ हल नहीं नीकल रहा था.
फिर किसिने पीस वाईस लेजीस्लेशेनका आईडिया बताया. आप मेरा मतलब समज गये होंगे. चाहे वो लोक पाल हो या जल लोक पाल बील. कैसा भी करके बील पास होने दो. कुछ प्रगत्ती जरुर होगी.
हिन्दु महिलाओंके लिये कानुन तो कई बने. फिर भी हालत आज भी वो ही है. आपको मालुम होगा ४-५ महिने पहले ऱोईटर ट्रस्टसे समाचार आये थे जिसमे कहा गया था महिला अत्याचारमें अगर हम गर्व ले सके तो ईतना ही की पाकीस्तान अत्याचारमें हमारे से आगे है. याने महिला अत्याचारमें प्रथम पांच मे चार नम्बर पाकीस्तानका है ओर भारतका नम्बर पांचवा है.
भृष्टाचार विरुद्धका अभियान आपके जिवनमें सफल होगा. रातो रात शक्य नहीं है.
भृष्टाचार ओर धर्मका सीधा सम्बध है ओर महाभारत, पृथ्वीराज चौहाण, शिवाजीके जमानेसे हमारे जीवनमें आ गया है.
कृपया कैसा भी हो लोक्पाल हो या जन लोकपाल? आने दो. सुचना अधिकार अब काम कर रहा है बस वैसा भी लोकपाल का काम होगा.
आपके अनशन से आपको भी नुकशान होता है ओर जनता को भी.

नरमाई होने से काम हो जायेगा. महात्मा गांधीके जमानेमेंभी कईने आहुती दी. बोम्ब रखे गये. अहिंसा से काम हो जायेगा. सख्ताईसे संसदमें बीलका कानुन देर से होगा.
जनतामें तम्बाकु प्रदर्शन ओर उपयोग मनाई है. फीर भी आदमी ओर महिलायें जन समुदायमें तम्बाकु खाते है.
कृपया कैसा भी करके लोकपाल बीलका कानुन होने दो. सभी सरकारी ओर अन्य कार्यालयोंमें चार्टर आने दो.
भवदीय
वीकेवोरा
www.vkvora2001.blogspot.com

10 comments:

  1. http://timesofindia.indiatimes.com/india/Government-wonders-why-Team-Anna-keep-issuing-warnings/articleshow/10568847.cms

    NEW DELHI: The government on Tuesday wondered why Team Anna keeps on issuing warnings when the Centre has repeatedly announced its commitment to bring a strong Lokpal Bill at the earliest.

    "This has been said by Anna and his associates many times. Before campaigning against Congress in Hisar also, they had said that they would compel the government to bring Lokpal bill... I do not know why they are making such statements when there is no need to compel the government for it," information and broadcasting minister Ambika Soni told reporters here.

    She was responding to questions on Hazare's letter to Prime Minister Manmohan Singh today in which he threatened to resume his fast on the last day of Parliament's winter session if the government fails to get a strong Jan Lokpal Bill passed by then.

    "A number of Cabinet ministers and the Prime Minister himself has said that we all want to a powerful Lokpal Bill. Standing committee examining is also speeding up its work in this direction by holding extra sittings.

    "There is no indication that there will be any delay in bringing the bill. When the government has reiterated its commitment to the bill so many times, I fail to understand what is the reason for their issuing warnings frequently," Soni said.

    In a letter to Prime Minister Manmohan Singh, the 74-year-old activist said he did not find it right that responsible people in government and Congress were making remarks that creates doubts about the passage of the bill.

    The winter session of Parliament will begin on November 22 and end on December 23.

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  2. http://www.dnaindia.com/india/report_anna-stir-has-lost-its-sting-says-congress_1606267

    Anna stir has lost its sting, says Congress
    Published: Wednesday, Nov 2, 2011, 9:15 IST
    By Parsa Venkateshwar Rao Jr | Place: New Delhi | Agency: DNA

    A senior member of the Congress party and Union cabinet minister, speaking off the record, says the Anna movement has gradually lost its sting, and would peter out in the days to come.

    In the periodic pre-poll party surveys that the Congress has been carrying out, there was concern from the middle of August to end of September that about 100 urban constituencies in Uttar Pradeshreflected the impact of Anna Hazare’s anti-corruption movement. People, especially the youth, were angry with the government, their ire against rising prices and the economic distress that this entailed building up into a wave against corruption.

    The same mood was visible and perceptible in the urban areas of Punjab as well. But the weekly pre-poll party surveys done by Punjab Congress leader Capt Amrinder Singh shows that anger against corruption in Punjab towns is petering out.

    The reason for the change in mood is that three prominent Team Anna members — Prashant Bhushan, Arvind Kejriwal and Kiran Bedi — have got into trouble of their own making.

    Similarly, Anna’s latest letter to prime minister Manmohan Singh that he would go on fast if the Jan Lokpal Bill is not passed in the winter session of Parliament is being seen as ineffective because he has written a little too many times.

    “A threat does not remain a threat when it is repeated too many times,” was the wry comment.

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  3. deshpremi, india का कहना है :
    02/11/2011 at 10:22 am

    लगता है अन्ना लोकपाल बिल से ज़्यादा अनशन मे इंट्रेस्टेड है. बार बार सरकार को अनशन की धमकी देकर लगता है अन्ना लोकपाल बिल को आने ही नही देना चाहते. साफ जाहिर है अन्ना किसी राजनीतिक पार्टी के हाथो खेल रहे हैं. अरे जब अनशन सत्र निकलने के बाद ही करना है तो पहले से ढोल पीटने की क्या ज़रूरत है. कोई भी ताकतवर किसी की धमकी से कोई काम कभी नही करता..चाहते हुए भी नही. अगर सरकार लोकपाल बिल लाना भी चाहती हो तो ऐसी धमकी के बाद नही लाना चाहेगी. अभी लोकसभा इलेक्शन मे बहुत समय है और सरकार की कोई मजबूरी नही है जो धमकी के प्रेशर मे कोई काम करे. अन्ना को तो इन बातो की समझ होनी चाहिए थी पर ऐसा प्रतीत होता है की अन्ना ने अपने दिमाग़ का इस्तेमाल करना छोड़ दिया है और वो किसी ऐसे व्यक्ति या ऐसी राजनीतिक पार्टी के इरादे का शिकार हो चुके है जो जनता मे अशांति फैलाने मे ज़्यादा विश्वास करते हैं.


    Pawan Shukla, Delhi का कहना है :
    02/11/2011 at 09:37 am
    एक डायलॉग याद आ रहा है "जब में एक बार कमिटमेंट कर लेता हूँ तो अपने आप की नही सुनता, दो बार कमिटमेंट कर लेता हूँ तो अपने बाप की नही सुनता और अगर तीन बार कमिटमेंट कर लूँ तो फिर मेरी कोई नही सुनता",� अन्ना जी सरकार और दिग्गी जैसे शातिर लोग आपके आंदोलन की हवा निकाल चुके हैं, अगर सरकार आपको और भ्रष्टाचार को गंभीरता से ले रही होती तो इस तरह के आंदोलनों की ज़रूरत ही नही सरकार केवल टाइम पास कर रही है और आगे भी उसे टाइम ही पास करना है. अच्छा होगा की इस सरकार से लोकपाल बिल पास करवाने के लिए प्रयास करने के बजाय 2014 में ऐसी सरकार लाने के लिए प्रयास शुरू किए जाएँ जो भ्रष्टाचार और भ्रष्ट�व्यवस्था�के�खिलाफ�दृढ़�संकल्प�के�साथ�काम�करे,�बेशक�इसके�लिए�नयी�पार्टी�ही�क्यों�ना�बनानी�पड़े,�अभी�3�साल�का�समय�है�इस�दिशा�में�विचार�कीजिए,�में�फिर�कहता�हूँ�की ,मौजूदा�सरकार�से�ये�उम्मीद�मत�रखिएगा�की�वो�कोई�कड़ा�लोकपाल�बिल�लाएगी.

    upsingh , ballia का कहना है :
    02/11/2011 at 09:08 am
    अन्ना जी आप पूरे समाज की हवा निकल रहे हू आप को पूरा देस समर्थन दे रहा है इस लिए नही की आप बी जे पी और आर एस एस का मुरगा बन कर देस की जनता को मूरख बना � रह अब आप को सा करने की जा है क्योकि आप ब लाल किरस्न आ जेसे दोगली भासा बोल रहे हो आप बांबे के गुंडा पार्टी बाल ठाकरे के बारे मे कायो नही बोलते आप उप को आपना रन छेत्रा बनयो गे तो आप को जूते ही जूते ही परेगे पहले बांबे के गुणडो से लार कर उत्तर भारत मे पर रखो उत्तर भारत ने नेता तो नमरद हो चुके है एक भ बी जे पी का नेता राज और उसके पब बाल ठाकरे के बारे मे क्यो नाहो बोलता है हमएसा ठाकरे सर आम उत्तर भारतीयो को नंगा कर है और बी जे पी के कुत्ते टाइप नेता लाल किरस्न अद्व और नितिन गणानकारी के तलवे चट्टे है� जब बी जे पी की सरकार बने की तो देस का पी एम देस को गिरवी रखने मोहन भागवत के घर जाएगा आब उत्तर भारत के नेताओ सरं करो अन्ना के तलव चतो

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  4. http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/11/111104_kejariwal_congress_pp.shtml

    केजरीवाल के पत्र पर भड़की कांग्रेस पार्टी

    टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे गए पत्र पर कांग्रेस ने कड़ी नाराज़गी जताई है.

    भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रह चुके अरविंद केजरीवाल को अपने त्यागपत्र के बाद विभाग को नौ लाख से कुछ ज़्यादा की राशि लौटानी थी. जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किया गया था.

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    अरविंद केजरीवाल ने 9,27,787 रुपए का चेक और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संबोधित एक पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा था.

    इस पत्र में केजरीवाल ने लिखा है कि उनके उन मित्रों को तंग न किया जाए, जिन्होंने उन्हें ये बकाया चुकाने के लिए ब्याज़ मुक्त कर्ज़ दिया है.

    पत्र

    पत्र में केजरीवाल ने यह भी लिखा है कि वे पाँच वर्षों से लगातार सरकार को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया है, जिसकी उन्हें सज़ा दी जा रही है. लेकिन सरकार ये मानने को तैयार नहीं.

    केजरीवाल ने लिखा है कि चेक भेजने का मतलब ये नहीं है कि वे अपना दोष स्वीकार कर रहे हैं, बल्कि वे विरोध के बीच ये चेक भेज रहे हैं.

    कांग्रेस को केजरीवाल का ये पत्र काफ़ी नागवार गुज़रा है. पार्टी प्रवक्ता राशिद अल्वी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा है कि ये देश के शीर्ष कार्यालय का अपमान है.

    पत्रकारों से बातचीत में अल्वी ने कहा, "केजरीवाल का प्रधानमंत्री को पत्र लिखना प्रधानमंत्री कार्यालय का अपमान है. मैं नहीं जानता कि केजरीवाल किस पद पर थे, लेकिन उन्हें ये पत्र अपने वरिष्ठ अधिकारी को लिखना चाहिए था, जो इस मामले पर ध्यान देता."

    राशिद अल्वी ने टीम अन्ना की एक और सदस्य और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की पूर्व अधिकारी किरण बेदी पर भी निशाना साधा और कहा कि वे भी ग़ैर सरकारी संगठनों से लिए अतिरिक्त पैसों को लौटाने के बाद प्रधानमंत्री को पत्र लिख सकती हैं.

    सवाल

    "टीम अन्ना के एक सदस्य कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए, तो एक अन्य सदस्य इकोनॉमी क्लास में सफ़र करती हैं और ग़ैर सरकारी संगठनों से अतिरिक्त पैसे लेती हैं. जबकि तीसरे सदस्य ये घोषणा करते हैं कि एक व्यक्ति संविधान से ऊपर होता है. मुझे पूरा भरोसा है कि अन्ना हज़ारे इसलिए मौन व्रत पर गए हैं क्योंकि अपने टीम के सदस्यों के आचरण पर सवालों का जवाब देना कठिन था"
    राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता

    अन्ना हज़ारे के मौन व्रत पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अन्ना हज़ारे ने अपने टीम के कुछ सदस्यों के आचरण पर परेशान करने वाले सवालों को टालने के लिए शायद मौन व्रत लिया होगा.

    राशिद अल्वी ने कहा, "टीम अन्ना के एक सदस्य कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए, तो एक अन्य सदस्य इकोनॉमी क्लास में सफ़र करती हैं और ग़ैर सरकारी संगठनों से अतिरिक्त पैसे लेती हैं. जबकि तीसरे सदस्य ये घोषणा करते हैं कि एक व्यक्ति संविधान से ऊपर होता है. मुझे पूरा भरोसा है कि अन्ना हज़ारे इसलिए मौन व्रत पर गए हैं क्योंकि अपने टीम के सदस्यों के आचरण पर सवालों का जवाब देना कठिन था."

    राशिद अल्वी ने लोकपाल विधेयक पर प्रशांत भूषण के संसद की स्थायी समिति के सामने पेश होने पर भी सवाल उठाए और कहा किकेजरीवाल के पत्र पर भड़की कांग्रेस पार्टी टीम अन्ना को प्रशांत भूषण के मामले में अपना रुख़ साफ़ करना चाहिए.

    उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराए जाने के बारे में प्रशांत भूषण का बयान भारत के रुख़ के ख़िलाफ़ तो है ही, बल्कि ये जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख़ का समर्थन भी करता है.

    http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/11/111104_kejariwal_congress_pp.shtml

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  5. अन्ना हजारे ने ब्लॉगर राजू परूलेकर से विवाद होने के बाद अपने ब्लॉग को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है। वह अपनी टीम से विचार-विमर्श कर 10 दिन के भीतर जल्द ही नया ब्लॉग शुरू कर सकते हैं।

    अन्ना ने 17 सितंबर को मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में अपना ब्लॉग शुरू किया था। अन्ना अपने विचार चिट्ठी के रूप में हाथ से लिखकर दिया करते थे, जिसे उन्होंने वेबसाइट पर अपलोड करने की जिम्मेदारी पेशे से पत्रकार राजू परूलेकर को दी थी।

    बहरहाल, जनलोकपाल आंदोलन की कोर समिति का पुनर्गठन करने संबंधी बयानों पर अन्ना द्वारा खुद को परूलेकर के बयानों से अलग कर लेने के बाद ब्लॉगर ने सार्वजनिक रूप से टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण पर आरोप लगाए थे।

    इसके बाद अन्ना ने ब्लॉग को बंद करने का निर्णय किया। इस ब्लॉग पर अन्ना की ओर से हाल ही में जारी आधिकारिक संदेश कहता है, ''यह ब्लॉग बंद कर दिया गया है।''

    इस बारे में पूछे जाने पर अन्ना के निजी सहयोगी सुरेश पठारे ने रालेगण सिद्धी से बताया कि पुराने ब्लॉग को बंद कर दिया गया है।

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  6. http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10826783.cms

    रालेगण सिद्धि।। पूर्व ब्लॉगर के साथ विवाद के बाद अपना ब्लॉग बंद करने वाले गांधीवादी अन्ना हजारे ने दोबारा अपना ब्लॉग शुरू किया है। गांवों के चौतरफा विकास का सपना बुनते हुए उन्होंने इस काम के लिए 'चरित्रवान' उद्योगपतियों को जोड़ने की जरूरत बताई।

    अन्ना हजारे ने नए ब्लॉग में जनलोकपाल बिल और खुद के लिए समर्थन मांगा है। इस ब्लॉग को उनके संगठन 'इंडिया अंगेस्ट करप्शन' के पते के साथ जोड़ा गया है। यह ब्लॉग सिर्फ अंग्रेजी और हिंदी में है जबकि उनके पुराने ब्लॉग को मराठी में भी पढ़ने की सुविधा थी।

    अन्ना ने मंगलवार को अपने ब्लॉग में जनलोकपाल, चुनाव सुधार और शक्तियों के विकेंद्रीकरण के अलावा भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आदर्श गांवों के विकास का ताजा अजेंडा पेश किया। उन्होंने देश के ग्रामीण विकास के लिए अपने गांव रालेगण सिद्धि का उदाहरण दिया और इस काम में 'चरित्रवान' उद्योगपतियों को शामिल करने की जरूरत पर बल दिया, जो देश की सेवा करने के लिए इच्छुक हों।

    गांधीवादी हजारे ने अपने ब्लॉगर राजू पारुलेकर के साथ विवाद के बाद इसी महीने अपना ब्लॉग बंद कर दिया था। उन्होंने मंगलवार को नए पते के साथ नया ब्लॉग लिखा। पेशे से पत्रकार पारुलेकर ही अन्ना हजारे का ब्लॉग पोस्ट किया करते थे।

    हजारे ने आरोप लगाया था कि पारुलेकर ने बिना उनसे बात किए टीम अन्ना की कोर कमेटी के पुर्नगठन पर उनका विचार जारी कर दिया था। हालांकि पारुलेकर ने इस आरोप का खंडन किया और हजारे का अप्रकाशित पत्र सार्वजनिक कर दिया, जिसमें उन्होंने टीम को पुर्नगठित करने की बात कही थी।

    अपने ताजा ब्लॉग में हजारे ने बड़े उद्योगों का समर्थन करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, 'हमारे देश के कई नेताओं को लगा कि बड़े-बड़े उद्योग खडे़ किए बिना देश का विकास नहीं होगा और हमारे नेता बड़े-बड़े उद्योग खड़े करने में लग गए। लेकिन जैसे-जैसे शहरों में उद्योग खड़े होते गए वैसे-वैसे गांव के लोग शहर की तरफ बढ़ते गए। शहर फैलते गए और झोपड़ियां बढ़ती गई, अपराध बढ़ गए। प्रकृति और मानवता का शोषण शुरू हुआ।'

    उन्होंने कहा, 'देश के अलग-अलग हिस्सों में सौ आदर्श गांव बनाने हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार को रोकना और दूसरी तरफ आदर्श गांव का निर्माण करना देश के विकास के लिए बहुत जरूरी काम है।' हजारे ने बताया कि देश के कई भागों से उनके पास 50 पढ़े-लिखे लोगों के पत्र आए हैं जो अपना जीवन समर्पण करने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा कई और लोग हैं जो इस पूरे आंदोलन से जुड़ना चाहते हैं।

    हजारे ने कहा, 'हमें पहले इनमें से चरित्रवान लोगों का चयन करना होगा और उन्हें प्रशिक्षण देना होगा। यह प्रशिक्षण तीन महीने का होगा। एक गांव के लिए दो नेता का चुनाव जरूरी है।' उन्होंने कहा कि आदर्श गांव के काम के लिए देश के राष्ट्रपेम की भावना वाले सद्चरित्र उद्योगपतियों को भी जोड़ना होगा। मुझे विश्वास है कि भ्रष्टाचार को रोकना और आदर्श गांव स्थापित करना देश को नई दिशा देने वाला काम होगा।

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  7. http://timesofindia.indiatimes.com/india/2G-scam-Supreme-Court-grants-bail-to-5-corporate-executives/articleshow/10839363.cms


    NEW DELHI: The Supreme Court on Wednesday granted bail to Unitech's Sanjay Chandra, Swan Telecom's Vinod Goenka and top Reliance ADAG executives Gautam Doshi, Hari Nair and Surendra Pipara in the 2G scam case.

    The judgment was delivered by a bench of Justices G S Singhvi and H L Dattu on Wednesday morning.

    The apex court asked each accused to give a bail bond of Rs 5 lakhs with 2 sureties each.

    This is the first verdict on bail petitions by the apex court after the trial court framed charges against all accused.

    All the 14 accused, including former telecom minister A Raja and DMK MP Kanimozhi, are lodged in Tihar jail.

    The bail plea of Kanimozhi and four others is due to come up for hearing before the Delhi high court on December one.

    This is the first time that any of the accused in the 2G scam has been granted bail.

    Other accused in the case include Raja's private secretary R K Chandolia, who is a suspended IRS officer, and former telecom secretary Siddhartha Behura, PTI reported.

    Others arrested in the case include Swan Telecom promoter Shahid Usman Balwa, his cousin Asif Balwa and their colleague Rajeev Agarwal, besides DMK-run Kalaignar TV MD Sharad Kumar and Mumbai filmmaker Karim Morani.

    Three telecom firms Reliance Telecom Ltd, Swan Telecom and Unitech (Tamil Nadu) Wireless Ltd too have been listed as accused in the CBI cahrgesheet in the case.

    The CBI had chargesheeted 14 persons in the scam, with Raja being the first to be arrested on February 2, along with his former Private Secretary Chandolia and former Telecom Secretary Behura.

    The five executives, who were on Wednesday granted bail, were arrested on April 20.

    Besides Kanimozhi, the four others who have moved the high court against the special court's order on bail are Kalaignar TV MD Kumar, Kusegaon Fruits and Vegetables Pvt Ltd directors Balwa and Rajeev Agarwal and film producer Morani.

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  8. http://www.divyabhaskar.co.in/article/MAH-anna-hazare-starts-new-blog-only-in-hindi-and-english-2584018.html

    તાજેતરમાં વિવાદ થયા બાદ અણ્ણાએ પોતાનો બ્લોગ બંધ કરી દીધો હતો

    તાજેતરમાં જ પોતાના બ્લોગ અંગે ચર્ચામાં આવેલા સામાજિક કાર્યકર અણ્ણા હજારેએ મંગળવારે પોતાનો નવો બ્લોગ શરૂ કર્યો છે. તેમના એક સાથીએ આ અંગે માહિતી આપી છે.

    અણ્ણાના નવા બ્લોગ પર શરૂઆતમાં એક લેખ જાહેર કરાયો છે. જેને 'ભ્રષ્ટાચારને રોકવો અને ગામડાઓનો વિકાસ : આ બે વાતો દેશના વિકાસ માટે મહત્વની છે'ના નામે જાહેર કરાયો છે.

    અણ્ણાના સાથીએ કહ્યું કે 'અણ્ણા હજારે સેજ ઇન્ડિયા અગેન્સ્ટ કરપ્શન ડોટ ઓર્ગ' પર તેમના વિચારો વાંચી શકાય છે.

    જૂના બ્લોગની સરખામણીએ અણ્ણનો આ નવો બ્લોગ માત્ર બે ભાષાઓ હિન્દી અને અંગ્રેજીમાં જ હશે. આ પહેલા તેમનો બ્લોગ ત્રણ ભાષાઓ હિન્દી, અંગ્રેજી અને મરાઠી એમ ત્રણ ભાષામાં હતો.

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  9. http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10857715.cms

    रालेगण सिद्धि।। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार पर गुरुवार को हुए हमले की खबर जैसे ही समाजसेवी अन्ना हजारे को मिली , उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा , ' सिर्फ एक थप्पड़ ?' बाद में उन्होंने इस पर सफाई दी और घटना की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।

    रालेगण सिद्धि में कुछ मीडियाकर्मियों ने जब अन्ना को पवार पर हमले के बारे में बताया तो उनकी पहली प्रतिक्रिया थी , ' उन्हें थप्पड़ पड़ा। सिर्फ एक थप्पड़ ?' लेकिन बाद में अपने कमरे से बाहर आते हुए हजारे ने घटना की निंदा की।

    (क्लिक करें, ब्लॉग पढ़ें : अन्ना के भीतर घुसी लादेन की आत्मा )

    सिर्फ एक एक थप्पड़ वाली बात पर अन्ना ने कुछ यूं सफाई दी। उन्होंने ने कहा कि वह करीब 200 से 300 मेहमानों से बात कर रहे थे और उसी समय किसी ने एक लिखित टिप्पणी भेजी कि पवार पर हमला हुआ। उन्होंने कहा , ' मैंने उनसे पूछा कि क्या पवार को सिर्फ थप्पड़ पड़ा या उनके साथ कुछ और भी हुआ। ' इसके बाद उन्होंने कहा कि यह पवार के चेहरे पर तमाचा नहीं बल्कि लोकतंत्र पर तमाचा था। अन्ना ने कहा , ' लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। मैं हमले की निंदा करता हूं। '

    उन्होंने कहा कि हिंसा की ऐसी घटनाएं ठीक नहीं हैं। अन्ना ने कहा , ' हमलावर शायद बहुत नाराज रहा होगा। यह अच्छी बात नहीं है। गुस्सा अच्छी बात नहीं है। हमारा संविधान हमें किसी के भी साथ हिंसक होने को नहीं कहता। '

    उन्होंने कहा , ' सरकार को सोचना होगा कि जनता का गुस्सा काबू में कैसे रखा जाए। लोग नाराज हैं। भ्रष्टाचार है। महंगाई है। जन लोकपाल का मुद्दा है।। लोग कई बातों को लेकर नाराज हैं। '

    बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा था कि अगर महंगाई नहीं रोकी गई तो हिंसा होगी। इस पर पर अन्ना ने कहा , ' लोकतंत्र में हिंसा नहीं होनी चाहिए।

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  10. http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10830563.cms

    महंगाई के बारे में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के विचारों पर पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने हैरानी जताई है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि वित्त मंत्री ने महंगाई को कम करने के लिए कोई उपाय नहीं सुझाए हैं और अगर सरकार का यही रवैया रहा तो महंगाई का मुद्दा हिंसा का कारण बन सकता है।

    बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि मंगलवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी महंगाई पर खुद संज्ञान लेते हुए संसद में बयान देने वाले थे लेकिन सदन की कार्यवाही स्थगित होने के कारण बयान नहीं आ सका। उन्होंने कहा कि बीजेपी को हैरानी हुई कि वित्त मंत्री को संसद के पहले दिन महंगाई पर सफाई देने की क्या जरूरत पड़ गई।

    उन्होंने कहा, 'वित्त मंत्री के 11 पन्नों के बयान को गौर से पढ़ने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि प्रणव मुखर्जी ने आम जनता को परेशान करने वाली इस समस्या से निदान का एक भी उपाय नहीं सुझाया है। सिन्हा ने कहा कि संसद के पिछले सत्र में महंगाई पर हुई चर्चा बेनतीजा रही और तीन महीने बाद भी सरकार का रुख गंभीर नहीं है और वह हाथ पर हाथ धरे बैठी है।'

    यशवंत सिन्हा ने कहा, 'अगर सरकार का यही रवैया रहा तो विपक्ष तो नाउम्मीद होगा ही साथ ही देश की जनता भी निराश हो जाएगी और जाहिर है लोगों का गुस्सा निकलेगा। अगर सरकार महंगाई के मुद्दे पर सोती रही तो यह मुद्दा हिंसा का कारण बन सकता है।'

    सिन्हा ने कहा, 'वित्त मंत्री ने अपने बयान में मार्च 2012 के अंत में महंगाई दर 6 से 7 प्रतिशत तक पहुंचने कॉमिटमेंट किया है। यानी देश की जनता को अगले 4 से 5 महीने तक महंगाई से निजात नहीं मिलने वाली है दूसरी ओर सरकार का यह आकलन किसी उपाय के आधार पर नहीं बल्कि पिछले साल के रुझानों के आधार पर किया गया है।'

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