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Friday, 18 November 2011

પત્થરાની પુજાનું ગતકડું


પત્થરાની પુજાનું ગતકડું

૧૯૮૯માં સ્ટીમ્બર ભરીને કુમ્પની માટે જસ્ત (ઝીંક) આયાત કર્યું. મોકલનાર પાર્ટી બેલ્જીયમની હતી અને પૈસા લંડનમાં ચુકવવાના હતા. માલ મુંબઈ આયાત કરવાનું હતું. દુબઈથી માલ ચડયો જે ૩-૪ દીવસની અંદર આવી જવો જોઈતો હતો. ૧૦-૧૨ દીવસના અંતે તપાસ કરતાં ખબર પડી કે એ માલવાહક જહાજમાં મુંબઈની ત્રણ પાર્ટીઓનો માલ હતો જેમાં બીજા બે જણાં મુંબઈમાં ભાડુ ભરવાના હતા. જહાજી ધંધામાં એ વખતે મંડી ચાલતી હતી એટલે ગોદી બહાર જહાજ કાઢી જહાજના માલીકે રુપીયા માંગ્યા. આવા સમાચાર હજી પણ છાપામાં આવે છે. હમણાં કીંગ ફીશર વાડો વિજય મલાયા પણ એજ તો કરે છે? આખી મેટર હું લંડનમાં લોઈડની વીમા કુમ્પનીમાં લઈ ગયો. ઘણી માથાકુટ પછી છ મહીને માલ તો મળ્યો પણ લંડન મેટલ એક્ષ્સચેન્જે ભાવ ઘટાડી નાખતાં નુકશાન ખુબ થયુ.

હવે આપણે નીચેની તસ્વીરો જોઈએ. આ તસ્વીરો મેં ગુગલમાં મુંબઈ વોર્સ્ટ એક્સીડેન્ટ્સ લખતાં બે લાખ તસ્વીરોમાંથી કોપી પેસ્ટ કરેલ છે.

તસ્વીર એકમાં ત્રણ તસ્વીર છે.

મુંબઈની લોકલ ટ્રેનમાં ગીરદીના સીન છે. દર ૩-૪ મીનીટે ટ્રેન આવે પણ ગીરદી પારાવાર. બરોબર જુઓ. વચલી તસ્વીરમાં મહીલાઓ છે અને પ્રથમ વર્ગની આ હાલત છે. અહીં ત્રીજી તસ્વીરમાં મુસાફરો ટ્રેન આવે એની રાહ જુએ છે.




તસ્વીરમાં ત્રણ એક્સીડેન્ટના સીન છે જે તસ્વીરમાં દેખાય છે. વચલી તસ્વીર બરોબર જુઓ. કારના વચ્ચેથી બે ટુકડા થઈ ગયા છે અને અડધા ટુકડો દેખાય છે.


તસ્વીરમાં એક્સીડેન્ટથી માનવ શરીરના શા હાલ થાય છે એ બતાવવામાં આવેલ છે.

અંગ્રેજીમાં પ્રોબાબીલીટી નામનો એક શબ્દ છે જેનો મતલબ થાય છે કે શક્ય શું છે? જેમકે સીકો ઉછાડીએ એટલે કાંતો કાંટો આવે નહીંતો છાપ જરુર આવે. આ કાંટાછાપ ગુજરાતી, મરાઠી, હીન્દી કે તેલુગુમાં એક જ શબ્દ વપરાય છે. આને કહેવાય જુગાર.

એનો મતલબ થાય છે કે પૃથ્વી ઉપર ધરતીકંપ થાય, સુનામી આવે, પૃથ્વીરાજ ચૌહાણ ગોરીની સાથે લડાઈમાં હારી જાય કે આબીદઅલી મરાઠાઓ સામે લડાઈ જીતીને પણ મરાઠી સૈન્યમાં વેશ્યાઓને જોઈ નફરત કરી જીતનો જશ્ન ન મનાવે. આવું બધું તો શક્ય છે. જુગાર રમીએ એટલે જીત થાય કે હાર થાય. ખીસાકાતરુ ગમે એવો નીષ્ણાત કે પીએચ.ડી. થયેલો હોય તો પણ દરેક વખતે દલો મળે એ શક્ય નથી.

હવે પત્થરની પુજા કરનારાની હાલત જોઈએ.

ભય, ડર, મોતની સામે આશ્ર્વાસન લેવા ધર્મગુરુઓએ આત્મા, કર્મ અને ધર્મનું ગતકડું શોધી કાઢ્યું અને ઓછ હોય એમ નરક અને મોક્ષની રચના કરી નાખી.

પછી તો બધાને મોક્ષમાં જવાની તાલાવેલી થવા લાગી અને ધર્મગુરુઓએ નવાનવા ગતકડાં ગોતી કાઢ્યા.

મીત્રો ઉપરની ત્રીજી તસ્વીર જોઈ આપણને દયા, કરુણા, વગેરે ઘણૂં ઘણું થતું હશેને? આ તસ્વીર કોઈને બતાવીએ તો એના શરીરના રોમ રોમામાં દુ:ખ અને ગ્લાની પણ થઈ જતી હશેને?

આ ધર્મગુરુઓએ પ્રોબાબીલીટી એ હકીકત છે એને બદલે ઠગાઈ કરી આત્મા, કર્મ, નરક અને મોક્ષની રચના કરી લોકોને ભય બતાવી ડરપોક, બીકણ અને અપંગ બનાવી નાખ્યા.

ફરી ક્યારેક મળીશું આ પત્થરની મુર્તીમાં પ્રાણ કેમ પુરવામાં આવે છે એ વીધી માટે.

5 comments:

  1. http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10745345.cms

    पीटीआई, भाषा ॥ मुंबई

    अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही किंगफिशर एयरलाइंस ने बैंकांे से शॉर्ट टर्म के लिए 700-800 करोड़ रुपये की पूंजी और ब्याज से छूट के रूप में मदद मांगी है। किंगफिशर को इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 469 करोड़ रुपये के घाटे की बात सामने आने के बाद किंगफिशर के चेयरमैन विजय माल्या ने कहा कि कंपनी 2000 करोड़ रुपये के राइट इशू जारी करने के लिए सेबी से कहने जा रही है। हमने तेल पर खर्च घटाने के लिए जेट फ्यूल सीधे आयात करने की इजाजत देने के लिए विदेशी व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) के यहां आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को एयरलाइंस में विदेशी निवेश की छूट देने पर भी विचार करना चाहिए।

    राजनीतिक दलों द्वारा किंगफिशर को बेलआउट देने के जोरदार विरोध पर माल्या ने कहा कि एयरलाइन ने सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मांगी है। हमने सरकार से करदाताआंे का पैसा देने को नहीं कहा है। हमारी बैंकांे के साथ खुले ऋण पत्र के लिए बातचीत चल रही है। इससे हम ऊंची लागत का रुपये वाले कर्ज चुका सकते हैं। बैंकांे से हमारी सिर्फ दो मांगें हैं- शॉर्ट टर्म की पूंजी जरूरत को पूरा करना और ब्याज पर छूट देना। हमने बैंकांे से ऋण के पुनर्गठन की मांग भी नहीं की है। कंपनी पर 7,057.08 करोड़ रुपये का कर्ज है।

    माल्या ने विमानन उद्योग को संकट से निकालने का तरीका ढूंढने संबंधी प्रधानमंत्री के बयान का स्वागत किया। उन्हांेने कहा कि प्रधानमंत्री इकनॉमिस्ट हैं, जो कनेक्टिविटी के महत्व को जानते हैं। तेल कंपनियांे के बकाये के बारे मंे माल्या का कहना था कि एयरलाइन को दो पब्लिक सेक्टर कंपनियांे इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम का एक भी पैसा बकाया नहीं है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 600 करोड़ रुपये के असुरक्षित बकाये के बारे मंे माल्या ने कहा कि तेल कंपनियांे को बैंक गारंटी दी गई है। हमारा असुरक्षित ऋण घटकर अब सिर्फ 40 करोड़ रुपये रह गया है।

    माल्या ने कहा कि एयरबस ए-380 सुपरजंबो खरीदने की योजना को पीछे सरका दिया है। हमें नहीं लगता कि अगले पांच साल में भी हम इन विमानों को डिलिवरी ले पाएंगे। किंगफिशर ने 5 ए380 विमानों का ऑर्डर दिया है, जो 2014 से मिलने वाले थे। पिछले एक सप्ताह में किंगफिशर की 200 से अधिक फ्लाइटें रद्द करने के फैसले को माल्या ने पूरी तरह व्यावसायिक कदम बताया।


    ठाकरे ने किया राहत पैकेज का विरोध

    भाषा ॥ मुंबई : शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने किंगफिशर को राहत पैकेज देने की सरकार की कोशिश का विरोध किया है। पार्टी के मुखपत्र सामना में उन्होंने लिखा कि यदि मनमोहन सिंह सरकार के पास ज्यादा पैसा है तो इसका इस्तेमाल मुंबई में बंद पड़ी कपड़ा मिलों को फिर शुरू करने और किसानों को कर्ज में छूट देने के लिए किया जाना चाहिए। किंगफिशर अपने मालिक विजय माल्या की वजह से परेशानी में ह ै।

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  2. http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10771391.cms

    भाषा॥ कानपुर : अज्ञानता , अंधविश्वास और जागरूकता न होना मिर्गी रोग के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है , जिसके चलते विश्व में लगभग 7 करोड़ लोग और भारत में करीब 1 करोड़ 20 लाख लोग इस रोग से पीडि़त है।

    विश्व मिर्गी दिवस पर गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ . नवनीत कुमार ने बताया कि देश में मिर्गी रोग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण अज्ञानता , अंधविश्वास और जागरूकता का न होना है। अभी भी देश के ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में लोग मिर्गी का दौरा पड़ने पर डॉक्टर के पास जाने की जगह ओझा , मंदिरों और मजारों के चक्कर लगाते है। उन्होंने कहा कि पहले वे इसे झाड़ फूंक से ठीक हो जाने वाला रोग मानते हैं। जब सब जगह से वे निराश हो जाते है और रोग बढ़ जाता है तो वे डॉक्टर के पास पहुंचते है।

    उन्होंने बताया कि मिर्गी के अधिकतर रोगी इलाज से ठीक हो जाते है , लेकिन यह इलाज थोड़ा लंबा चलता है। रोग के लक्षणों के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें रोगी का अचानक बेहोश हो जाना , हाथ - पैर एंेठ जाना , मुंह से झाग निकलना और रोगी का चलते - चलते गिर जाना शामिल है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कालेज का मेडिसिन विभाग मिर्गी रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है और वहां लोगों को पर्चे बंटवाकर और शिविर लगाकर लोगों को जागरूक कर रहा है।ष्ट्व

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  3. http://www.bbc.co.uk/news/uk-england-birmingham-15775920

    Comtel Air cancels Amritsar to Birmingham flights

    One of the passengers filmed the moment the airline asked for £23,000 to complete the journey

    An airline accused of asking passengers to pay extra for fuel to fly home has cancelled UK flights at the weekend.

    A Comtel Air flight from Amritsar to Birmingham was grounded in Vienna on Tuesday by its Spanish carrier Mint Lineas Aereas due to financial issues.

    Passengers said they were "held to ransom" and asked to pay a total of £23,000 to continue their journey.

    Comtel majority shareholder Bhupinder Kandra said money paid to travel agents had not been passed on to the airline.

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  4. http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/11/111102_undp_report_da.shtml



    संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी की गई मानव विकास रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत में, दुनिया के सबसे ज़्यादा बहुआयामी ग़रीब रहते हैं.

    भारत में 61 करोड़ लोग ग़रीब हैं, जो कि देश की आधी आबादी से भी ज़्यादा है.
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    रिपोर्ट में 'बहुआयामी ग़रीबी' का मूल्यांकन करने के लिए आय के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को भी तरजीह दी गई.

    रिपोर्ट के मुताबिक बहुआयामी ग़रीबों की संख्या निकालने वाला ये सूचकांक एक समुचित-सटीक तस्वीर पेश करता है जो कि केवल आय के मानकों से संभव नहीं हो सकती.

    इस सूचकांक के मुताबिक़ दुनिया के दस सबसे ग़रीब देश तो सब-सहारा अफ़्रीका में हैं, लेकिन अगर किसी एक देश में कुल संख्या की बात की जाए तो दुनिया के सबसे ज़्यादा ग़रीब दक्षिण एशियाई देशों (भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश) में रहते हैं.

    भारत सरकार ने देश में ग़रीबों की संख्या आंकने के लिए कई तरीके अपनाए हैं और सरकार ये मानती है कि देश की एक-तिहाई जनता ग़रीबी रेखा के नीचे रहती है

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  5. http://navbharattimes.indiatimes.com/mumbaiarticleshow/10832851.cms

    सेंट्रल रेलवे की लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वाले लोगों को थोड़ी सी राहत मिलने वाली हैं , क्योंकि बुधवार से सेंट्रल रेलवे की मेन लाइन पर सभी लोकल ट्रेनों में 12 कोच होंगे। सेंट्रल रेलवे पर लोकल ट्रेनों में प्रतिदिन लगभग 35 लाख यात्री सफर करते हैं। लोकल ट्रेनों में डिब्बे बढ़ने से इन 35 लाख यात्रियों का सफर थोड़ा ही सही मगर सुकून वाला होगा।

    वर्तमान में सेंट्रल रेलवे पर 785 लोकल ट्रेनें चल रही हैं , जिनमें से अब तक 56 ट्रेनें 9 डिब्बों की थी। सेंट्रल रेलवे के अनुसार , 9 डिब्बों के पांच नए रैक मिले हैं यानी कुल 45 नए डिब्बों को 56 लोकल ट्रेनों में जोड़कर उन्हें 12 कोच की ट्रेनों में कनर्वट किया गया है। इसके बाद सीएसटी से कसारा और कर्जत - खोपोली तक चलने वाली सभी लोकल ट्रेनें 12 डिब्बों की होंगी।

    करना पड़ा लंबा इंतजार
    सेंट्रल रेलवे पर पहली 12 डिब्बों की लोकल ट्रेन 8 सितंबर , 1986 को चलाई गई थी। इन पच्चीस सालों में यात्रियों की संख्या में कई गुना बढ़ोत्तरी हुई हैं। सेंट्रल रेलवे के अनुसार , कोच की संख्या बढ़ाने के साथ प्लेटफॉर्म की लंबाई भी बढ़ाना पड़ी। यह आसान काम नहीं था। इन समस्याओं से निबटने के लिए तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा जिसके बाद सभी ट्रेनें 12 कोच की हो सकी है।

    पिछले तीन वर्षों में सेंट्रल रेलवे ने लोकल ट्रेनों में यात्रियों की क्षमता 11.5 प्रतिशत बढ़ाई है। तीन साल पहले सेंट्रल रेलवे की लोकल ट्रेनों की प्रतिदिन कुल 1410 सर्विसेज थी जिसे बढ़ाकर 1573 किया गया। इसी तरह कोचों की संख्या 13998 से बढ़ाकर 16896 कर दी गई। हालांकि ट्रांस हार्बर लिंक ( ठाणे - वाशी रूट ) पर 128 में से 80 सर्विसेज अभी भी 9 डिब्बों की हैं।

    हार्बर लाइन पर करना होगा इंतजार
    सेंट्रल रेलवे के अनुसार , हार्बर लाइन पर 12 डिब्बों की लोकल चलाने के लिए अभी कई मुश्किलों का सामना करना है। मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रॉजेक्ट ( एमयूटीपी ) के फेज -3 में मेन हार्बर लाइन पर 12 डिब्बों की लोकल चलाने की योजना अभी तक डिस्कशन स्टेज तक ही पहुंच सकी है।

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