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Friday, 3 January 2020

साचुं...? खोटुं...? राम जाणे... ? साउदी अरेबीया, ईरान ईराक अने अमेरीका....हुमला उपर हुमला.... बधुं बीबीसी अंग्रेजी अने हींन्दी मांथी

साचुं...?  खोटुं...?  राम जाणे... ? साउदी अरेबीया, ईरान ईराक अने अमेरीका....हुमला उपर हुमला.... बधुं बीबीसी अंग्रेजी अने हींन्दी मांथी

https://www.nytimes.com/interactive/2019/09/16/world/middleeast/trump-saudi-arabia-oil-attack.html

https://www.bbc.com/news/world-middle-east-50989745

https://www.bbc.com/news/world-middle-east-50980704

https://www.bbc.com/news/world-middle-east-24316661

सुलेमानी की मौत से भारत में बढ़ेगी तेल की क़ीमत?

https://www.bbc.com/hindi/india-50985174


जनरल सुलेमानी के पीछे क्यों पड़ा था अमरीका?

https://www.bbc.com/hindi/international-50985050


https://www.bbc.com/hindi/international-50980009

जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत मध्य-पूर्व में कितना बड़ा टर्निंग पॉइंट?


वहीं ईरान में तीन दिन का शोक घोषित करते हुए देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतोल्लाह अली ख़मेनेई ने कहा कि 'इस हमले के अपराधियों से गंभीर बदला' लेने का इंतज़ार है.
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अमरीका के लिए उनका मारा जाना इतनी बड़ी बात थी कि ख़ुद राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया जिसमें केवल अमरीकी राष्ट्रध्वज की तस्वीर थी - यानी इस घटना को एक तरह से राष्ट्रपति ट्रंप अमरीका का राष्ट्रीय गौरव की तरह पेश कर रहे थे.

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नवभारत टाईम्स हींन्दी ....
सरकार के लिए भी टेंशन 
प्रभुदास लीलाधर के सीईओ-पीएमएस अजय बोडके ने कहा, 'अमेरिकी हमले में कासिम सुलेमानी के मारे जाने की खबर बहुत महत्वपूर्ण है। वह ईरान के सबसे बड़े नेता के बेहद करीबी थे। ईरान निश्चित तौर पर जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे तेल की कीमतों में उबाल आएगा। यह तेल आयात करने वाले देशों के लिए बुरी खबर है। खासतौर पर भारत जैसे देश जो बड़े व्यापार और चालू खाते का घाटा का सामना कर रहे हैं।' 

ईरान के कुद्स फोर्स के मुखिया सुलेमानी पर अमेरिका ने उस समय हमला किया जब उनका काफिला इराक में बगदाद एयरपोर्ट की ओर बढ़ रहा था। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने कहा है कि सुलेमानी के हत्यारों को इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। 
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क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद इराक़ में क्या हो रहा है?



ईरान के सैन्य कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी के जनाज़े में शामिल होने के लिए इराक़ की राजधानी बग़दाद में लोगों की भारी भीड़ सड़कों पर उतर आई है.
गुरुवार को अमरीकी हमले में क़ासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. बग़दाद हवाई अड्डे के बाहर हुए हवाई हमले में सुलेमानी समेत पाँच ईरानी और पाँच इराक़ी लोग मारे गए थे.
सुलेमानी ईरान की बहुचर्चित कुद्स फ़ोर्स के प्रमुख थे. यह फ़ोर्स ईरान द्वारा विदेशों में चल रहे सैन्य ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए जानी जाती है.
सुलेमानी ने वर्षों तक लेबनान, इराक़, सीरिया समेत अन्य खाड़ी देशों में योजनाबद्ध हमलों के ज़रिये मध्य-पूर्व में ईरान और उसके सहयोगियों की स्थिति को मज़बूत करने का काम किया था.
सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा. उनकी मौत के बाद ये माना जा रहा है कि ईरान इसका बदला ज़रूर लेगा.

https://www.bbc.com/news/in-pictures-51007585

 President Donald Trump has faced growing criticism over his threats to attack Iran's cultural sites.
Mr Trump made the threats amid fallout from the US assassination of Iranian commander Qasem Soleimani.
The president said cultural sites were among 52 identified Iranian targets that could be attacked if Iranians "torture, maim and blow up our people".
But the UN's cultural organisation and UK foreign secretary were among those to note that such sites were protected.
The US and Iran have signed conventions to protect cultural heritage, including during conflict. Military attacks targeting cultural sites are considered war crimes under international law.
Qasem Soleimani was killed in a US drone strike in Baghdad on Friday on the orders of Mr Trump. The killing has sharply increased regional tensions, with Iran threatening "severe revenge".







From  BBC  copyright


ईरान-अमरीका में जंग हुई तो भारत पर कितना बुरा असर होगा?









Wednesday, 1 January 2020

Hemchandra

Monday, 30 December 2019

जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा भारत- पाँच बड़ी ख़बरें

जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा भारत- पाँच बड़ी ख़बरें



जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा भारत- पाँच बड़ी ख़बरें


मुस्लिम देशों का संगठन OIC

मुस्लिम देशों का संगठन OIC 









Tuesday, 24 December 2019

इन कश्मीरियों की दुनिया

इन कश्मीरियों की दुनिया


https://www.bbc.com/hindi/india-50885254


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दो परमाणु सशस्त्र पड़ोसी मुल्क़ों के बीच 13 दिन तक यह युद्ध चला था. इस उपमहाद्वीप को उस युद्ध की बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी और सबसे ज़्यादा उन लोगों को, जो युद्ध के कारण बिछड़ गए.
ये ऐसे ही लोगों की कहानी है, जो 1971 के युद्ध के दौरान अलग हुए और फिर कभी भी उन्हें मिलने की अनुमति नहीं मिल पाई.
भारत प्रशासित कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के सुदूर उत्तर में ऐसे ही चार गाँव स्थित हैं, जो युद्ध के दौरान भारत के क़ब्ज़े में आए थे. इनका नाम है- तुरतुक, त्याक्शी, चलूंका और थांग.
छोटे-छोटे इन चार गाँवों तक पहुँचना आसान नहीं है. ये गाँव लद्दाख क्षेत्र की नुब्रा घाटी में सबसे दूर स्थित हैं. इनके एक तरफ श्योक नदी बहती है और दूसरी तरफ कराकोरम पर्वत शृंखला की ऊँची चोटियाँ हैं







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दो परमाणु सशस्त्र पड़ोसी मुल्क़ों के बीच 13 दिन तक यह युद्ध चला था. इस उपमहाद्वीप को उस युद्ध की बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी और सबसे ज़्यादा उन लोगों को, जो युद्ध के कारण बिछड़ गए.
ये ऐसे ही लोगों की कहानी है, जो 1971 के युद्ध के दौरान अलग हुए और फिर कभी भी उन्हें मिलने की अनुमति नहीं मिल पाई.
भारत प्रशासित कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के सुदूर उत्तर में ऐसे ही चार गाँव स्थित हैं, जो युद्ध के दौरान भारत के क़ब्ज़े में आए थे. इनका नाम है- तुरतुक, त्याक्शी, चलूंका और थांग.
छोटे-छोटे इन चार गाँवों तक पहुँचना आसान नहीं है. ये गाँव लद्दाख क्षेत्र की नुब्रा घाटी में सबसे दूर स्थित हैं. इनके एक तरफ श्योक नदी बहती है और दूसरी तरफ कराकोरम पर्वत शृंखला की ऊँची चोटियाँ हैं.







Thursday, 19 December 2019

gauchar गौचर land encroachment Gujarat

Wednesday, 11 December 2019

जब खाया नहीं जाता, तो इतना तीखा खाते क्यों हैं हम?

जब खाया नहीं जाता, तो इतना तीखा खाते क्यों हैं हम?








पिछले साल एक अमरीकी अस्पताल के इमरजेंसी रूम में एक व्यक्ति को भर्ती कराया गया. डॉक्टर ये पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि उसे आख़िर हुआ क्या है. वो व्यक्ति तेज़ सर दर्द, गर्दन में दर्द से तड़प रहा था और उसे बार-बार उल्टी आ रही थी.
सीटी स्कैन, पेशाब की जांच, ब्लड प्रेशर जांच और शारीरिक जांच करने के बाद डॉक्टरों को पता चला कि उस व्यक्ति पर ज़हर का असर नहीं था और ना ही उसे कोई रहस्यमयी बीमारी थी, बल्कि उसने एक बहुत ही तीखी मिर्ची खा ली थी.
मिर्ची की जो किस्म उन्होंने खाई थी, उसका नाम है "कैरोलिना रीपर" (ये जेलापीनो पेपर से 275 गुना ज़्यादा तीखी है). 34 साल के इस शख़्स ने एक प्रतियोगिता में ये मिर्च खाने का फ़ैसला किया था.
ये मिर्च खाने की वजह से उनके दिमाग़ की धमनियां सिकुड़ने लगी थीं, लेकिन क़िस्मत से वो बच गए और बाद में पूरी तरह ठीक हो गए.




शहर जहां अकबर पैदा हुए और राणा रतन सिंह को फांसी हुई





Monday, 9 December 2019

उन्नाव रेप केस: दोस्ती, शादी, बलात्कार और जलाकर मार डालने की कहानी- ग्राउंड रिपोर्ट

Wednesday  8th January, 2020


बिहार में बीच चौराहे से छात्रा को अगवा कर 'गैंगरेप' का आरोप





उन्नाव रेप केस: दोस्ती, शादी, बलात्कार और जलाकर मार डालने की कहानी- ग्राउंड रिपोर्ट






Monday, 2 December 2019

क़ानूनी तरीक़े से लाखों डॉलर कैसे कमा रहे हैं भारतीय हैकर्स

क़ानूनी तरीक़े से लाखों डॉलर कैसे कमा रहे हैं भारतीय हैकर्स






BBC Hindi Tuesday 07.01.2020

वो क्रिप्टोक्वीन, जिसने दुनिया को लूटा और फ़रार हो गई