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Wednesday, 22 August 2012

प्रमोशन में रिजर्वेशन के विरोध में प्रदर्शन



प्रमोशन में रिजर्वेशन के विरोध में प्रदर्शन

नवभारत टाइम्स | Aug 20, 2012, 01.03AM IST

जंतर मंतर।। प्रमोशन में आरक्षण के विरोध में जंतर मंतर पर समता आंदोलन समिति के प्रदर्शन में लोगों इसके खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठे। समिति के अध्यक्ष पाराशर नारायण शर्मा ने कहा कि 21 अगस्त को केंद्र सरकार ने इस पर विधेयक लाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है और 22 अगस्त को संसद में पांचवीं बार प्रमोशन में आरक्षण पर संविधान संशोधन विधेेयक लाने की तैयारी की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण असंवैधानिक है। विधेयक लाने से पहले सरकार जनता के बीच जाकर समर्थन ले। सरकार की इस मंशा को हम सफल नहीं होने देंगे और इसके लिए हम आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। पाराशर ने कहा कि हमने 789 सांसदों को पत्र भेजकर इस विधेयक के विरोध में मत देने के लिए समर्थन मांगा है। 

समता आंदोलन समिति के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शन में अखिल भारतीय समता मंच, पंजाब से जनरल कैटिगरी वेलफेयर फेडरेशन, मिशन-72, ऑल इंडिया एंटी रिजर्वेशन फ्रंट, यूथ फॉर इक्वालिटी, वर्ल्ड ब्राह्मण ऑर्गनाइजेशन, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन, अखिल भारतीय राजपूत समाज, भारत वर्षीय जंगीर सभा एवं दिल्ली राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के समता आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्थान के सभी जिलों व तहसीलों के अध्यक्ष व कार्यकारिणी के सदस्य शामिल हुए।


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प्रमोशन में रिजर्वेशन पर ज्यादातर पार्टियां सहमत
प्रमोशन में रिजर्वेशन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक
भाषा | Aug 22, 2012, 09.12AM IST

नई दिल्ली।। सरकार ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) को प्रमोशन में रिजर्वेशन के मामले में संविधान संशोधन बिल लाने की अपनी योजना फिलहाल टाल दी। इस मुद्दे पर मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में ज्यादातर राजनीतिक दलों ने वैधानिक रूप से टिकाऊ कानून की मांग की है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि सरकार इस बारे में संशोधन लाने की पक्षधर है और इसके सभी पक्षों का कानूनी रूप से निरीक्षण करने बाद जल्द ही एक संशोधन विधेयक लाएगी। गौरतलब है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के उत्तर प्रदेश सरकार के 28 अप्रैल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद इस मुद्दे पर विचार करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी।

बैठक में मनमोहन सिंह ने कहा, 'सरकार वर्तमान स्थिति के संभावित समाधान का रास्ता तलाश रही है।' बैठक के दौरान सिर्फ समाजवादी पार्टी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। मुख्य विपक्षी दल बीजेपी समेत कई दलों के नेताओं ने सुझाव दिया कि सरकार को जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए और सभी पक्षों पर सावधानी से विचार करने के बाद ही संवैधानिक संशोधन विधेयक लाना चाहिए।

तीन घंटे चली बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा, 'सभी राजनैतिक दलों के विचार सुनने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार और कांग्रेस अनुसूचित जाति-जनजाति को प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के पक्षधर हैं। कुछ राज्यों के ऐसे ही प्रावधान को न्यायालयों ने खारिज कर दिया है... इस तरह के संशोधन को कानूनी रूप से टिकाऊ होना चाहिए। सरकार ऐसा संशोधन लाएगी, जो कानूनी रूप से टिकाऊ होगा। संशोधनों को जल्द ही लाया जाएगा। हम इस पर काम कर रहे हैं।' नारायणसामी ने नौ अगस्त को राज्यसभा में घोषणा की थी कि सरकार इस मामले में 22 अगस्त को एक संशोधन विधेयक लाएगी।

अपने कार्यकाल में यह फैसला करने वाली बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विधेयक को वर्तमान मॉनसून सत्र में लाने का निवेदन किया था। उधर एसपी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा, 'ऐसा विधेयक नहीं आएगा। अगर संसद में यह विधेयक पेश हुआ तो हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे, चाहे हम अकेले क्यों न हों।' उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसका विरोध कर रही है क्योंकि इससे एक खास समुदाय के जूनियर अधिकारी छलांग लगा कर अपने साथ काम करने वालों से सीनियर बन जाएंगे।

सूत्रों ने बताया कि बीजेपी नेता सुषमा स्वाराज ने कहा है कि उनकी पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन करती है लेकिन इसे जल्दबाजी में न लाकर ठीक से जांच करनी चाहिए। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी और सीपीआई नेता डी राजा ने भी इस विधेयक को जल्दी लाने का समर्थन किया।

बैठक शुरू होने पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'सरकार वर्तमान स्थिति का संभावित हल तलाश रही है।' उन्होंने पार्टियों के नेताओं से महत्वपूर्ण सुझाव मांगे ताकि कानूनी समाधान तक पहुंचा जा सके। उन्होंने कहा कि इससे सरकार को इस मुद्दे पर निर्णय करने में काफी सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा, 'आप जानते होंगे कि सरकार हमेशा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों की रक्षा को प्रतिबद्ध है और कुछ अवसरों पर संवैधानिक संशोधन में भी नहीं हिचकती है।'

मनमोहन के संबोधन के बाद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस तरह के विधेयक के पक्ष और विपक्ष दोनों में विचार रखे। सूत्रों ने बताया कि यूपीए के सहयोगी दल डीएमके और तृणमूल कांग्रेस भी विधेयक लाने की पक्षधर हैं। उधर जेडीयू नेता शरद यादव ने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव पहले ही उनके पार्टी की सरकार वाले बिहार में लाया जा चुका है और वह इसके समर्थक हैं।

1 comment:

  1. http://www.divyabhaskar.co.in/article/NAT-central-government-in-favor-of-the-promotion-of-reservations-3677912.html

    વડાપ્રધાન ડૉ. મનમોહનસિંઘે મંગળવારે મળેલી સર્વપક્ષીય બેઠકમાં કહ્યું હતું કે સરકાર સરકારી નોકરીઓમાં બઢતી તબક્કે અનામતની જોગવાઈનો અમલ કરવાની તરફેણમાં છે. જોકે સપાએ આ દરખાસ્ત સામે વિરોધ નોંધાવ્યો છે અને બસપા તો આ મુદ્દે વર્તમાન સત્રમાં જ સુધારા ખરડો ઇચ્છે છે. પરંતુ બાકીના પક્ષો આ મુદ્દે મત જાહેર કરવાથી બચી રહ્યા છે.

    બેઠકમાં વડાપ્રધાને કહ્યું કે સરકારી નોકરીઓમાં એસસી-એસટીને બઢતી તબક્કે અનામતનો લાભ આપવાના મુદ્દે સુપ્રીમે આપેલા ચુકાદાથી મામલો પેચીદો બની રહ્યો છે. સરકાર આ સ્થિતિનો સામનો કરવા વિકલ્પો શોધી રહી છે. એક વિકલ્પ છે બંધારણમાં સુધારો. સર્વપક્ષીય બેઠકમાં વડાપ્રધાને માહિતી આપી હતી કે ૧૬ નવેમ્બર ૧૯૯૨ના રોજ સુપ્રીમ કોર્ટે ઇન્દિરા સાહની કેસમાં ચુકાદો આપતાં બઢતી તબક્કે અનામતના આપવામાં આવતા લાભને બંધારણવિરોધી નીતિ ગણાવી હતી. પરંતુ પાંચ વર્ષ સુધી તેનો અમલ ચાલુ રાખવા છૂટછાટ આપી હતી.

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