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Wednesday, 29 January 2014

યુનેસ્કો પ્રકાશન -૨૦૧૩-૨૦૧૪નો રીપોર્ટ. બધા માટે શીક્ષણ. ઈરીના બોકોવા મહાસંચાલક અને સંચાલક પોલીન રોજ.

યુનેસ્કો પ્રકાશન -૨૦૧૩-૨૦૧૪નો રીપોર્ટ. બધા માટે શીક્ષણ. ઈરીના બોકોવા મહાસંચાલક અને સંચાલક પોલીન રોજ.

ગરીબ બાળકો માટે શીક્ષણ એ હજી શક્ય નથી. દેશમાં જે બાળકોને શીક્ષણ મળે છે એમાંથી પાંચ ધોરણા સુધીના મહારાષ્ટ્રના ૪૪ ટકા અને તામીલનાડુના ૫૩ ટકા બાળકોને બે આંકડાના સરવાળા બાદબાકીનું સાદુ ગણીત આવડતું નથી. દેશની બધી મહીલાઓને લખતાં વાંચતા હજી ૫૦-૭૦ વરસ લાગશે એટલે કે ૨૦૮૦ સુધી રાહ જોવી પડશે.



(રીપોર્ટ ડાઉન લોડ કરવા માટેની લીન્ક છે.)







(રીપોર્ટની તારીખ આજ બુધવાર ૨૯-૦૧-૨૦૧૪ છે.)


આ લીન્કને કલીક કરી બીબીસી અંગ્રેજી અને બીબીસી હીન્દીમાં  વધુ વીગતો જાણો.....











(ટાઈમ્સ ઓફ ઈન્ડીઆના આજના સમાચાર...)

ભારત, ચીન, પાકીસ્તાન, બાંગલા દેશ, નાઈજેરીઆ, ઈથોપીઆ
આ બધામાં આપણો દેશ પ્રથમ....પણ શેમાં?








(ટાઈમ્સ ઓફ ઈન્ડીઆના આજના સમાચાર...)









(ગામની પ્રાથમીક શાળાના બાળકો સાથે અને બીજા ફોટામાં પરીવારના યુવાનો સાથે....)






(મારી શાળા. ગેટ ખુલ્લો છે અને શાળાના બે ખંડ દેખાય છે. શાળા સ્થાપના ઈ.સ. ૧૯૫૫. 
ધોરણ છ સુધી સમજો કે ૧૯૬૨ સુધી અહીં અભ્યાસ કરેલ છે.)










5 comments:

  1. http://www.jagran.com/news/world-india-has-highest-population-of-illiterate-adults-un-report-11046921.html

    संयुक्त राष्ट्र। भारत में निरक्षरों की आबादी सबसे ज्यादा है। यही नहीं अमीरों और गरीबों के बीच शिक्षा के स्तर में भारी असमानता है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अनपढ़ वयस्कों की आबादी करीब 28.7 करोड़ है। यह दुनिया में अशिक्षित लोगों का कुल 37 प्रतिशत है।

    2013/14 सभी के लिए शिक्षा वैश्रि्वक निगरानी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में साक्षरता दर 1991 में 48 प्रतिशत थी। 2006 में यह बढ़कर 63 प्रतिशत पहुंच गई। यानी जनसंख्या में वृद्धि की तुलना में निरक्षरों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। यूनेस्को की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सबसे अमीर युवतियों को पहले ही वैश्रि्वक स्तर की साक्षरता मिल चुकी है, लेकिन सबसे गरीब के लिए ऐसा 2080 तक ही संभव है। भारत में शिक्षा के स्तर में मौजूद भारी असमानता दर्शाती है कि सबसे ज्यादा जरूरतमंदों को पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।

    रिपोर्ट में कहा गया, '2015 के बाद के लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्धता जरूरी है ताकि सबसे ज्यादा पिछड़े समूह तय लक्ष्यों के मापदंडों पर खरे उतर सकें। इसमें विफलता का अर्थ यह हो सकता है कि प्रगति का पैमाना आज भी संपन्न को सबसे ज्यादा लाभ पहुंचाने पर आधारित है।' रिपोर्ट के मुताबिक वैश्रि्वक स्तर पर प्राथमिक शिक्षा पर दस प्रतिशत खराब गुणवत्ता की शिक्षा पर खर्च हो रहा है। इन हालातों के चलते गरीब देशों में चार युवा लोगों में एक कुछ भी नहीं पढ़ सकता। भारत में गरीब और अमीर राज्यों के बीच शिक्षा के स्तर को लेकर भारी असमानता है। हालांकि अमीर राज्यों की सबसे गरीब लड़की गणित में थोड़ा बहुत जोड़ घटाना कर लेती है। भारत के संपन्न राज्यों में से एक केरल में प्रति छात्र शिक्षा का खर्च 685 डॉलर [करीब 42 हजार 627 रुपये] था।

    अमीर राज्यों में शुमार महाराष्ट्र और तमिलनाडु में वर्ष 2012 तक ज्यादातर ग्रामीण बच्चे कक्षा पांच तक पहुंच गए थे। हालांकि इनमें कक्षा पांच के महाराष्ट्र के 44 प्रतिशत और तमिलनाडु के 53 प्रतिशत बच्चे ही दो अंकों में घटाव को कर पाए। इन राज्यों के अमीर ग्रामीण बच्चों में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया। तीन में से दो लड़कियां गणना करने में सक्षम थीं। महाराष्ट्र की गरीब ग्रामीण लड़कियों ने गरीब राज्य में शुमार मध्य प्रदेश में अपनी समकक्षों से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया। रिपोर्ट में कहा गया कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गरीबी के कारण कक्षा पांच तक बच्चों के स्कूल में पढ़ने की संभावना प्रभावित होती है। इन दोनों राज्यों में गरीब लड़कियों को मूल बातें सीखने का बहुत कम मौका मिलता है। दोनों राज्यों में पांच में से एक बुनियादी जोड़ घटाना कर पाती है।

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  2. સરસ માહીતી.
    શીક્ષકો પાસેથી ભણાવવા સીવાયની કેટલી બધી કામગીરી લેવામાં આવે છે ?! પાંચપાંચ વરસ લગી બાંધ્યા પગારે લટકાવી રાખવામાં આવે છે ! કોઈ કામ ન મળે તો શીક્ષક થવામાં માનનારું માનસ અને ટ્યુશનીયા વાતાવરણમાં બાળકો નબળાં ન રહે તો બીજું શું થાય ?!

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    1. આમ છતાં હજી હું શીક્ષકના વ્યવસાય માટે પ્રચાર પ્રસાર રોજ કરું છું. તાલુકામાં મામલતદાર કે વીકાસ અધીકારી એવું ઘણું કામ આપતા હોય છે જે આ શીક્ષક સીવાય બીજું કોણ કરે?

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  3. पीटीआई, यूएन. नवभारत टाईम्समें समाचार है...

    भारत में निरक्ष्रर युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा : रिपोर्ट

    Jan 30, 2014, 07.00AM IST

    पीटीआई, यूएन. नवभारत टाईम्समें समाचार है...

    दुनिया में निरक्ष्रर युवाओं की सबसे ज्यादा आबादी भारत में है, यह कहना है संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट का। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऐसे युवाओं की तादाद 28 करोड़ 70 लाख है और यह संख्या दुनिया के अशिक्षित निरक्ष्रर युवाओं का 37 प्रतिशत है। यूएन का कहना है कि इससे पता चलता है कि भारत में अमीर और गरीब के बीच शिक्षा को लेकर कितनी असमानताएं हैं।
    2013/14 एजुकेशन फॉर ऑल ग्लोबल मॉनिटरिंग नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की साक्षरता दर साल 1991 के 48 प्रतिशत से बढ़कर साल 2006 में 63 प्रतिशत हो गई। लेकिन इस दौरान जनसंख्या में हुई बढ़ोतरी की वजह से किसी तरह का फायदा नहीं हुआ और निरक्ष्रर युवाओं की तादाद में कोई कमी नहीं आई। इस रिपोर्ट को युनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) ने तैयार किया है।

    रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारत की सबसे अमीर युवा महिलाओं को सार्वभौमिक साक्षरता मिल चुकी है, लेकिन गरीब महिलाओं को इस मुकाम तक पहुंचने में साल 2080 तक का वक्त लग जाएगा। इस लिहाज से भारत में मौजूद ये निराशाजनक स्थितियां दिखाती हैं कि सबसे ज्यादा जरूरतमंद लोगों तक पर्याप्त सहयोग नहीं पहुंचा है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वैश्विक स्तर पर शिक्षा की समस्या के कारण सरकारों को हर साल 129 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है। इसमें कहा गया कि दुनिया के दस देशों में निरक्ष्रर लोगों की तादाद 55 करोड़ 70 लाख है और यह कुल निरक्ष्रर लोगों की संख्या का 72 प्रतिशत है। दुनिया भर में प्राइमरी एजुकेशन पर जो खर्च किया जाता है उसका 10 प्रतिशत शिक्षा की खराब क्वॉलिटी की वजह से बर्बाद हो जाता है। इस स्थिति की वजह से गरीब देशों में, हर चार में से एक युवा एक वाक्य पढ़ने में भी नाकाम रहता है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के सबसे अमीर राज्यों में से एक, केरल में हर शख्स के एजुकेशन पर 685 डॉलर खर्च किया जाता है।

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  4. 'पाकिस्तान का पेशावर पोलियो की सबसे बड़ी खदान'

    एएफपी | Jan 17, 2014, 09.29PM IST

    WHO: Pakistani City Becomes Top Reservoir of Polio


    इस्लामाबाद

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को ऐलान किया कि पाकिस्तान का उत्तर पश्चिमी शहर पेशावर पोलियो के मामले में 'दुनिया की सबसे बड़ी खदान' है। डब्ल्यूएचओ ने इस इलाके में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया तुरंत तेज करने की बात कही है।

    गौरतलब है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान और नाइजीरिया के साथ दुनिया के उन चुनिंदा तीन देशों में से एक है, जहां इसका पूरी तरह से उन्मूलन नहीं हो सका है। हालांकि, पाक ही ऐसा देश है, जहां इसके मामलों में 2012 के मुकाबले 2013 में तेजी आई है।

    डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 2013 में पाकिस्तान में सामने आए पोलियो के हर मामले में एक समानता यह है कि ये आनुवांशिक तौर पर पेशावर में फैल रहे पोलियो के वायरस से मिलते-जुलते हैं। डब्ल्यूएचओ ने अपने बयान में कहा, 'पाकिस्तान में पोलियो के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामले जेनेटिक तौर पर पेशावर से जुड़े हैं।'
    खैबर पख्तूनवा प्रांत और आसपास के इलाके पोलियो के हॉटस्पॉट के तौर पर उभर रहे हैं। पेशावर खैबर पख्तूनवा प्रांत की राजधानी है और ये इलाके तालिबान और अलकायदा के ठिकानों के तौर पर जाने जाते हैं। इस बीमारी को जड़ से मिटाने की कोशिशों पर आतंकवादी संगठनों द्वारा किए जा रहे विरोध का खासा असर पड़ रहा है। ये संगठन वैक्सीनेशन प्रोग्राम को बाहरी तत्वों द्वारा जासूसी के लिए कवर के तौर पर इस्तेमाल के रूप में देखते हैं। इसके अलावा, वैक्सीनेशन के द्वारा नपुंसकता फैलने की अफवाह तो है ही।

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