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Monday, 21 May 2012

राष्ट्रपति ने एक और दोषी पर की 'दया'


http://www.bhaskar.com/
  Last Updated 14:04(21/05/12)

राष्ट्रपति ने एक और दोषी पर की 'दया'
नई दिल्ली. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने ओमप्रकाश नाम के एक नौकर की मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया। ओमप्रकाश की दया याचिका पर राष्ट्रपति ने यह निर्णय लिया। ओमप्रकाश पर देहरादून में रिटायर्ड ब्रिगेडियर श्याम लाल खन्ना और उनके परिवार के दो सदस्यों की हत्या का आरोप है। करीब 18 साल पहले हुए इस हत्याकांड में ब्रिगेडियर की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने उसे फांसी की सजा देते हुए कहा था कि इस मामले में मौत की सजा सबसे उपयुक्त है। सुप्रीम कोर्ट ने उस दलील को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि अपराध के समय ओमप्रकाश युवा था। लेकिन राष्ट्रपति ने उसे माफ कर दिया।

तीन दशक की सबसे दयालु राष्ट्रपति पाटील

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील पिछले तीन दशक की सबसे दयालु राष्ट्रपति साबित हुई हैं। उन्होंने अब तक अपने कार्यकाल में 27 लोगों की फांसी की सजा को उम्र कैद में बदला है। भीलवाड़ा के आरटीआई कार्यकर्ता एसएस रणावत की अर्जी के जवाब में यह जानकारी मिली। पाटील ने अब तक सिर्फ पांच लोगों की याचिका को खारिज किया है। इसमें राजीव गांधी की हत्या में शामिल तीन लोग संथम, मुरुगन और अरिवू शामिल हैं। इसके अलावा 1993 में दिल्ली कार धमाके के दोषी देविंदर पाल सिंह भुल्लर और ट्रक ड्राइवर एसोसिएशन के लीडर के हत्यारे असम के महेंद्र नाथ दास की याचिका भी खारिज हुई।

बार-बार 'झूठ' बोलती है मां

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/13119809.cms


बार-बार 'झूठ' बोलती है मां

13 May 2012, 1450 hrs IST,नवभारत टाइम्स  


मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। ऐसा अकसर होता था, जब हमारे पास खाने तक को कुछ नहीं होता था। जब भी हम खाने बैठते, मां अपने हिस्से का खाना भी मुझे दे देती। जब वह अपना खाना मेरी प्लेट में डाल रही होती थी, तो कहती- बेटा, यह खाना भी तू खा ले। मुझे आज भूख जरा कम है।
यह मां का पहला झूठ था।

मैं थोड़ा बड़ा हुआ। मेरी शिक्षा ठीक तरह से चलती रहे, इसके लिए उसने एक माचिस बनाने के कारखाने में काम करना शुरू कर दिया। वहां से एक दिन वह माचिस के खाली डिब्बे घर लाई, जिन्हें तीलियों से भरा जाना था। काम बहुत ज्यादा था, सो करते-करते रात हो गई, लेकिन काम खत्म नहीं हुआ। देर रात जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मां अब भी मोमबत्ती जलाकर माचिस के डिब्बों में तीलियां भर रही है। मुझे बड़ा दुख हुआ। मैंने उससे कहा- मां, अब सो जाओ। वैसे भी बहुत रात हो चुकी है और तुम थक भी गई होगी। यह काम सुबह कर लेना। मां बोली- नहीं, नहीं, मुझे नींद नहीं आ रही है। मैं थकी हुई भी नहीं हूं। तू आराम से सो जा।
यह मां का दूसरा झूठ था।

बात उस दिन की है, जब मुझे परीक्षा देने जाना था। मां भी मेरे साथ गई। जब तक परीक्षा चली, मां ने तपती गर्मी में स्कूल के बाहर मेरा इंतजार किया। जब परीक्षा खत्म होने हुई तो मैं उससे मिलने आया। मां ने मुझे एक गिलास ठंडा शरबत दिया, जिसे वह घर से करके लाई थी। मां को गर्मी से परेशान पाकर मैंने अपना गिलास उसे दे दिया और कहा- मां, यह शरबत आप पी लो। मां ने कहा- नहीं, नहीं, यह तेरे लिए है। मेरा बिल्कुल मन नहीं है अभी शरबत पीने का।
मां ने तीसरी बार झूठ बोल दिया।

पिताजी की मौत के बाद मां को अकेले ही मेरी परवरिश करनी पड़ी। मेरी पढ़ाई का खर्च और दूसरी जरूरतों के लिए मां को दिन-रात काम करना पड़ता। पिताजी के जाने के बाद अकेलापन उसकी जिंदगी में आ ही गया था। पड़ोस की आंटी हमारी मदद करती थीं, फिर भी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे थे। आंटी ने सलाह दी कि मां को दूसरी शादी कर लेनी चाहिए, जिससे उन्हें भावनात्मक सहारा मिलेगा। मां ने इनकार कर दिया। उसने कहा- मुझे किसी के साथ की जरूरत ही महसूस नहीं होती।
यह मां का चौथा झूठ था।

मेरी पढ़ाई पूरी हो गई और मुझे विदेश में नौकरी मिल गई। इस वक्त मेरी मां को काम छोड़कर रिटायर हो जाना चाहिए था, लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया। उसने काम करना जारी रखा। फिर भी मैं हर महीने उसे पैसे भेज देता था। हैरानी की बात यह थी कि हमेशा वह मेरे पैसे वापस मुझे ही भेज देती थी और कहती कि मुझे पैसे की जरूरत नहीं है। मेरे पास भरपूर पैसे हैं।
यह मां का पांचवां झूठ था।

मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए मैंने अपनी पार्ट टाइम पढ़ाई जारी रखी। इस डिग्री को पूरा कर लेने के बाद मेरी सैलरी एकदम बढ़ गई। मैंने फैसला कर लिया कि अब मां को अपने साथ ले आऊंगा और उसकी पूरी सेवा करूंगा। लेकिन मां अपने बेटे को परेशान नहीं करना चाहती थी। कहने लगी- मैं विदेशी रहन-सहन की आदी नहीं हूं। वहां मेरा मन नहीं लगेगा और न ही मुझसे वहां रहा जाएगा। इसलिए मैं यहीं ठीक हूं।
मां ने छठी बार झूठ बोला था

बुढ़ापे में मां को कैंसर हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। सात समंदर पार से मैं मां को देखने गया। मां बिस्तर पर लेटी थी। मुझे देखकर उसने मुस्कराने की कोशिश की, यह जताने के लिए कि उसे कुछ नहीं हुआ है। मैं मन ही मन टूट गया। वह इतनी कमजोर नजर आ रही थी। उसने कहा- रोओ मत बेटा, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
यह मां का सातवां झूठ था।

200 रूपए की मासिक वृद्धा पेंशन देना अपमानजनक है


http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/13318563.cms


200 रूपए की मासिक वृद्धा पेंशन देना अपमानजनक है: रमेश



नई दिल्ली।। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने शनिवार कहा है कि वृद्धजनों को दी जाने वाली 200 रूपए की मासिक पेंशन 'व्यक्ति की मर्यादा का अपमान' है और उन्होंने प्रधानमंत्री से इस योजना की तत्काल समीक्षा करने का अनुरोध किया। 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे पत्र में मंत्री रमेश ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत वितरण प्रणाली को एक उचित दिशा प्रदान करने की सिफारिश की है। इस योजना के तहत 60 साल से अधिक उम्र के तीन करोड़ लोगों को प्रति माह दो सौ रूपए दिए जाते हैं। 

16 मई के अपने इस पत्र में उन्होंने कहा, 'मेरा हमेशा से यह मत रहा है कि हम जो पेंशन राशि दे रहे हैं वह व्यक्ति की मर्यादा का अपमान है।' 

पेंशन परिषद के संयोजक बाबा अधव और अरूणा रॉय के साथ बैठक के बाद मंत्री ने यह मुद्दा उठाया है। परिषद की महत्वपूर्ण मांगों में इस योजना में गरीबी रेखा की शर्त को हटाना, पेंशन राशि 200 से बढ़ाकर तीन सौ रुपये करने तथा पुरूषों के लिए 60 से 55 तथा महिलाओं के लिए 50 करना शामिल है। 

रमेश परिषद की गरीबी रेखा संबंधी शर्त हटाने पर राजी हैं लेकिन वह उम्र घटाने पर सहमत नहीं हैं। उन्होंने वितरण के संबंध में लिखा है कि पेंशनभोगियों को कई महीने में एक बार एकमुश्त मिलने के बजाय हर महीने पेंशन दी जाए।

Sunday, 20 May 2012

રાજધાની દીલ્લીમાં મૃત્યુ

http://www.indianexpress.com/news/more-than-1-000-unidentified-bodies-found-in-delhi-this-year/951630/


More than 1,000 unidentified bodies found in Delhi this year

Updated: Sun, 20 May 2012 19:43 ISTThe Indian Express










New Delhi, Sun May 20 2012, 15:17 hrs 



Over 1,000 unidentified bodies have been found in the national capital this year with official statistics suggesting that at least seven such cases are recorded on an average daily.
The recent incident was reported on Friday in which the chopped body of a man, with the head and torso missing, was found in a bag at Defence Colony in south Delhi. Last Monday, the decomposed body of an unidentified youth was recovered in a bag at central Delhi's Prasad Nagar.
Alarmed over the rise in such cases, Delhi Chief Minister Sheila Dikshit flagged her administration's concerns with Union Home Minister P Chidambaram who suggested that the most of the unidentified bodies being recovered in the city are from the neighbouring states.
Chidambaram's views also suggest that Delhi is fast becoming a favoured place for criminals to dump bodies of victims.
According to official statistics, 1,012 unidentified bodies were recovered in the capital this year till May 19. Last year, the figure was 3,337.
The highest number of bodies (245) were found in North Delhi this year while 116 bodies were found in Central Delhi.
In Outer Delhi, 72 bodies were recovered while North-East Delhi had 68 such incidents. The figures for other districts are: East (60), South East (57), West (56), North-West (55), South (48), New Delhi (31) and South West (28).
Crime and Railways Wing of Delhi Police has also registered 175 such cases while IGI Airport police one case.
A senior police official said criminals find it easy to dump bodies in Delhi after killing the victims elsewhere.

































































Tuesday, 8 May 2012

રામ નો જન્મ સુપ્રીમ કોર્ટ નક્કી કરી આપસે.

http://www.divyabhaskar.co.in/article/NAT-advani-to-be-included-in-cbi-list-3228892.html


રામ નો  જન્મ સુપ્રીમ  કોર્ટ નક્કી કરી આપસે.
બાબરી મુદ્દે સુપ્રીમમાં અડવાણીને ઘેરશે CBI

Source: Agency, New Delhi   |   Last Updated 1:44 PM [IST](07/05/2012)
 
 

સીબીઆઈએ સુપ્રીમ કોર્ટને જણાવ્યું છે કે, બાબરી મસ્જિદના કેસમાં ભાજપના નેતા લાલકૃષ્ણ અડવાણી ઉપરથી મસ્જિદનો ધ્વંસ કરવા માટે ષડયંત્ર રચવાનું આરોપ હટાવવાની તેઓ વિરૂદ્ધ છે. એટલું જ નહીં પરંતુ તેઓ ઈચ્છે કે, અડવામી અને બીજા નેતાઓ પણ આરોપી કારસેવકોની જેમ કેસનો સામનો કરે.
-બાબરી મુદ્દે સુપ્રીમમાં અડવાણીને ઘેરશે CBI -કારસેવકોની જેમ કેસનો સામનો કરે ભાજપના નેતા -વધી શકે છે મુશ્કેલીઓ
આ કેસમાં પહેલા બે એફઆઈઆર નોંધાઈ હતી. એફઆઈઆર 197-92માં કારસેવકો સામે ફરિયાદ દાખલ કરવામાં આવી છે. આ કારસેવકોએ વિવાદાસ્પદ ઢાંચો તોડ્યો હતો. જ્યારે બીજી એફઆઈઆર 198-92 હેઠળ નોંધવામાં આવી હતી. જેમાં અડવાણી, મુરલી મનોહર જોશી. વિનય કટિયાર, ઉમા ભારતી, અશોક સિંઘલ, ગિરિરાજ કિશોર, વિષ્ણુહરિ ડાલમિયા અને ઋતુંભરા દેવી સામે હતા. જેમાં આરોપ મુકવામાં આવ્યો હતો કે, તેમણે કારસેવકોને ઉશ્કેરતા ભાષણ કર્યા હતા.
સીબીઆઈ દ્વારા તાજેતરમાં દાખલક રવામાં આવેલા સૌગંધ નામામાં જણાવવામાં આવ્યું હતું કે, પ્રથમ એફઆઈઆરમાંથી કેટલાક નામો હટાવી દેવામાં આવે. કારણ કે, બાંધકામને તોડવાનું કામ તેમણે પ્રત્યક્ષ રીતે કર્યું ન હતું. બંને એફઆઈઆર અલગ-અલગ નથી. કારણ કે, બંનેના તથ્યો અને ઘટનાસ્થળ એક જ છે.
અડવાણીને કઠેડામાં ઊભા રાખતા સીબીઆઈએ કહ્યું હતું કે, બાબરીની કાર્યવાહી શરૂ થતા પહેલાથી જ ત્યાં હાજર રહેલા નેતાઓના નામ બીજી એફઆઈઆરમાં છે. આ નેતાઓ મંચ પરથી લોકોને ઉશ્કેરી રહ્યાં હતા. જેના કારણે દંગા ફેલાઈ ગયા હતા અને કારસેવકોએ તોફાન મચાવી દીધું હતું.
ત્રીસ પેઈજની એફિડેવિટમાં સીબીઆઈએ દાવો કર્યો છે કે, જેવો બાબરીનો ધ્વંસ થયો હતો કે, આરોપી નેતાઓ તથા અન્યોએ તાળીઓ પાડી હતી અને એકબીજાને ભેંટ્યા હતા. આ તકે મંચ પરથી મીઠાઈનું વિતરણ પણ કરવામાં આવ્યું હતું. આરોપી નેતાઓનો મંચ બાબરીથી માત્ર 175 મીટરના અંતરે હતો અને અહીંથી બધું સ્પષ્ટ દેખાતું હતું.

Sunday, 29 April 2012

બંધારણ અને અસ્પૃસ્યતા, આભળછેટ


અસ્પૃસ્યતા આભળછેટ અને બંધારણ

17. अस्पृश्यता का अंत -- ''अस्पृश्यता'' का अंत किया जाता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध किया जाता है। ''अस्पृश्यता'' से उपजी किसी निर्योषयता को लागू करना अपराध होगा जो विधि के अनुसार दंडनीय होगा।

ઉપરની લીન્કમાં દેશનું બંધારણ  આપેલ  છે.  બંધારણના આર્ટીકલ  ૧૭માં આભળછેટનો ઉલ્લેખ  છે આ  આર્ટીકલનો બંધારણમાં સમાવેશ  થવો એ  બતાવે છે કે ખ્રીસ્તી અને મુસલીમો સીવાયના બધા હીન્દુઓ   પોતાના જ  ભાઈઓ  ઉપર  અત્યાચાર  કરતા હતા.  

આજના જમાનામાં પણ  આ  બાબત  નીયમીત  સમાચાર  આવતા રહે છે અને એ  હીસાબે આભળછેટનો નાસ  થયો નથી.

હીન્દુ અને ધર્મ ગુરુ ઉપર  ખાસ  આ  કલંક  અને કાળી ટીલી  છે.  બંધારણના આ  આર્ટીકલને કાઢી  નાખવા કોઈ  ધર્મ ગુરુ ચળવળ  સરુ  કરે એ  જરુરી છે...




Sunday, 15 April 2012

ગુજરાતી દીવ્ય ભાસ્કરમાં અભીવ્યક્તીમાં બે તંત્રી લેખ

મીત્રો,

શુક્રવાર ૧૩.૪.૨૦૧૨ અને શનીવાર ૧૪.૪.૨૦૧૨ના ગુજરાતી દીવ્ય ભાસ્કરમાં અભીવ્યક્તીમાં નીચેના બે તંત્રી લેખ છે.

મુળ લેખ માટે લીન્ક આપેલ છે.

http://www.divyabhaskar.co.in/article/ABH-editorial-this-is-big-won-of-peoples-3104164.html

==લોકહિતની આ જીત છે મોટી==

જાહેર હિતની આ મોટી જીત છે. સુપ્રીમ કોર્ટે મફત અને ફરજિયાત શિક્ષણના અધિકારનો કાયદો (આરટીઇ)ની વિવિધ જોગવાઇઓની બંધારણીય કાયદેસરતાની પુષ્ટિ કરી દીધી છે.તેમાં કાયદાની એ કલમનો પણ સમાવેશ થાય છે, જેની હેઠળ સરકારી ગ્રાન્ટ વિના ચાલતી ખાનગી શાળાઓમાં ૨૫ ટકા બેઠકો ગરીબ બાળકો માટે અનામત રાખવાની જોગવાઇ છે.

મુખ્ય ન્યાયમૂર્તિ એસએચ કાપડિયાની અધ્યક્ષતા હેઠળની બેન્ચે એ સ્પષ્ટ કરી દીધું છે કે સરકારી ગ્રાન્ટ વિના ચાલતી લઘુમતી શાળાઓ સિવાયની બધી શાળાઓ માટે આરટીઇ કાયદો સમાન રીતે લાગુ થશે. તેને લીધે દેશભરમાં ૬ થી ૧૪ વર્ષની વયનાં તમામ બાળકોને શાળાનું શિક્ષણ આપવાની મહત્વાકાંક્ષી યોજનાના માર્ગમાંનો મોટો અવરોધ દૂર થયો છે. હવે તમામ બાળકોને શિક્ષણ અપાવવાની જવાબદારી સરકારોની છે.આરટીઇના અમલનો અત્યાર સુધીનો રેકોર્ડ બહુ સારો નથી. આમ છતાં આ દિશામાં પ્રગતિના જરૂર સંકેત છે.

આઝાદી પછી ૧૪ વર્ષ સુધીની વયનાં તમામ બાળકોને શિક્ષણ ઉપલબ્ધ કરાવવાનું લક્ષ્ય બંધારણમાં માર્ગદર્શક સિદ્ધાંતો હેઠળ રાખવામાં આવેલું હતું. ૨૦૦૨માં બંધારણીય સુધારા થકી પ્રાથમિક શિક્ષણને બાળકો માટેનો મૂળભૂત અધિકાર બનાવવામાં આવ્યો હતો. તેનો અમલ કરાવવા માટે ૨૦૦૯માં આરટીઇ કાયદો બન્યો, જે ૧લી એપ્રિલ ૨૦૧૦થી અમલમાં આવ્યો. પરંતુ તેનો અમલ ધીમી ગતિથી ચાલી રહ્યો છે. આમે ય પહેલેથી જ શિક્ષણ જેવી મૂળભૂત જરૂરિયાતને પૂરી કરવાની દિશામાં ઘણું મોડું થઇ ચૂક્યું છે.

દેશે જો વિકાસને પંથે આગળ વધવું હોય અને લક્ષ્યાંકો પાર પાડવાં હોય તો હવે આમાં વધુ વિલંબ કોઇ રીતે ચલાવી શકાય એમ નથી. શિક્ષણ એ જાહેર અને રાષ્ટ્રીય જવાબદારી છે એ ભાવનાને સુપ્રીમ કોર્ટના નિર્ણયથી વધુ સમર્થન મળ્યું છે. આ નિર્ણયનો પૈગામ એ છે કે સૌને શિક્ષિત કરીને જ્ઞાનનો ઉજાસ ફેલાવવો એ એવો હેતુ છે જેના માર્ગમાં નાહકની દલીલોના આધારે કોઇ અવરોધ ઊભો થવો ન જોઇએ.


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http://www.divyabhaskar.co.in/article/ABH-editorial-marriage-and-divorce-3109687.html


==લગ્ન અને છુટાછેડા, સલામતી અને સુવિધા==

કાયદાનો ઉદ્દેશ સલામતી અને સુવિધા આપવાનો હોય છે. એટલે બદલાતા સમયની જરૂરિયાતો પ્રમાણે એને વિકસિત કરતા રહેવામાં આવે એ જરૂરી છે. આથી જન્મ અને મૃત્યુની નોંધણી માટેના કાયદા-૧૯૬૯માં સંશોધન કરીને તેના હેઠળ લગ્ન રજિસ્ટ્રેશન ફરજિયાત કરવાની જોગવાઈ આવકારદાયક છે. તેને લીધે લગ્નના કાનૂની દસ્તાવેજો તૈયાર કરવા સરળ થશે ઉપરાંત ખાસ કરીને આંતરધર્મીય લગ્ન કરનાર દંપતીઓને કાનૂની સલામતી પણ મળી રહેશે.

લગ્નનો આધાર પરસ્પરનો વિશ્વાસ હોવો જોઈએ પરંતુ અનેક પરિસ્થિતિઓ આવા સંબંધોમાં કાયદાકીય સલામતીની માંગ કરતી હોય છે. રજિસ્ટ્રેશનની જોગવાઇ એ સ્પષ્ટ કરે છે કે લગ્ન કાયદેસર થયેલાં છે અને તેની સામે કોર્ટમાં રજુ કરેલા દસ્તાવેજ નકલી છે એ સાબિત ન થાય ત્યાં સુધી કોઈ વિરોધ નથી. હમણાં થોડાં અઠવાડિયાં પહેલાં સરકારે છુટાછેડાની પ્રક્રિયાને સરળ કરવાનો નિર્ણય કર્યો છે. પતિ-પત્ની એ નિર્ણય પર આવ્યાં હોય કે એમના વિવાદગ્રસ્ત સંબંધો સુધરે એવી કોઈ શક્યતા નથી તો તરત જ છુટાછેડા આપી દેવાની હવે વ્યવસ્થા કરાશે.

એ સાથે લગ્નજીવન દરમિયાન કમાયેલી સંપત્તિમાં પત્નીના હકની પણ જોગવાઈ હશે, જે કુટુંબમાં સ્ત્રીના વિશેષ યોગદાનની સ્વીકૃતિરૂપે હશે. આમ સરકારે લગ્ન અને છુટાછેડા માટેની કાયદાકીય વ્યવસ્થાને આધુનિક, ન્યાયપૂર્ણ, વધુ માનવીય અને સહજ બનાવવાનો પ્રયત્ન કર્યો છે. કોઈ જટિલતા વિના લગ્ન કરી શકવા માટે અને જો લગ્નજીવન બરાબર ચાલતું ન હોય તો સહેલાઈથી છુટાછેડા મેળવવાની જોગવાઈ સભ્ય સમાજની નિશાની છે.

સિદ્ધાંત એ છે કે સંબંધમાં નિર્ણાયક તત્વ બે વ્યક્તિઓની પસંદગી હોય છે. જ્યારે બે વ્યક્તિઓ એકબીજાંને ચાહતી હોય તો તેમના અધિકારને કાયદાનું સંરક્ષણ મળવું જોઈએ. એ રીતે તેઓ સાથે રહેવા ન માગતાં હોય તો તેમના અલગ થવામાં કોઈ અવરોધો ન આવવા જોઈએ. પરંતુ આખાય ક્રમમાં સામાજિક યથાર્થની અવગણના કરી શકાતી નથી. એટલે એવા કાયદાની જરૂર છે કે જે સંબંધિત વ્યક્તિઓને કાયદાકીય રક્ષણ આપે. આશા છે કે એવું જ થશે







Friday, 30 March 2012

હીન્દુ કલ્ચરે રૅશનાલીઝમને અપનાવ્યા વીના છુટકો નથી

http://govindmaru.wordpress.com

હીન્દુ કલ્ચરે રૅશનાલીઝમને અપનાવ્યા વીના છુટકો નથી..પ્રા. ધવલ મહેતા

‘Culture Can Kill’ પુસ્તકની સમીક્ષાનો આ બીજો – અન્તીમ ભાગ છે. આ પુસ્તકના લેખક શ્રી. સુબોધ શાહ ગુજરાતી છે અને વર્ષોથી અમેરીકાના ન્યુ જર્સી સ્ટેટમાં રહે છે. તેઓ પ્રખર રૅશનાલીસ્ટ છે. આ પુસ્તકમાં તેમણે ધર્મ અને ધાર્મીક વીધીઓથી તથા રુઢીઓથી લથપથ હીન્દુ કલ્ચરની સખત આલોચના કરી છે. લેખકે ન્યુ જર્સીમાં રૅશનાલીસ્ટ મીત્રવર્તુળ ઉભું કર્યું છે. લેખકનું તારણ એ છે કે ભારતીય કલ્ચરે ખાસ કરીને હીન્દુ ધર્મે તેની જડતા અને અન્તર્મુખતાને કારણે વીદેશી આક્રમકો અને શાસકો સામે સતત હાર ખાધી છે; છતાંય દમ્ભ છોડ્યો નથી.

http://govindmaru.wordpress.com/2012/03/29/dhawal-mehta-4/#comment-...

vkvora Atheist Rationalist says:

લેખક શ્રી સુબોધ ભાઈ શાહે સાચું લખ્યું છે કે હીન્દુ ધર્મ કે જન્મ થી મરણ સુધીની વીધીઓમાં દંભ સીવાય બીજું કાંઈજ નથી.

દરેક જણ અભીમાન કરવા લાગ્યો કે હું કે મારો વર્ણ ઉચ્ચ અને હું જ ખરો ક્ષત્રીય કે વેદના જાણનારો બ્રાહ્મણ.

૨૬.૦૧.૧૯૫૦ના ભારતના બંધારણમાં આભળછેટ બાબત સ્પસ્ટ ઉલ્લેખ છે જેણે દંભ ખુલ્લો કર્યો છંતા આજની તારીખમાં હીન્દુઓ જાત પાત કે ઉચ્ચ નીચ્ચ જાતીની દેખરેખ અને સુંઘ સુંધ કરવામાંથી ઉચાં આવ્યા નથી.

હીન્દુ સમાજની આ વર્ણ વ્યવસ્થા અને દંભી અભીમાન વૃત્તીમાં મહાભારત અને રામાયણની કાલ્પનીક કથાઓએ ટેકો આપ્યો.

કોપરનીક્સ, ગેલેલીયો, એડવર્ડ જેનેર, ન્યુટન, વગેરે જે કર્યું એ તો અમને અને અમારા વેદ, ઉપનીસદમાં લખેલ છે એટલે ખબર છે બસ આજ હીન્દુ સમાજે ગાંણુ ગાયું અને મુઠીભર ઈસ્લામના સાસકોએ હીન્દુઓને એમના કર્મની સજા કરી જે મોક્ષ મલસે એ માન્યતામાં હજી ભોગવે છે.

વીધવા પુન લગ્ન પ્રતીબંધ હતો કારણ વીધવા પુનઃ લગ્ન કરે તો નરકમાં જાય અને પુનઃ લગન કરનાર વીધવાને મારી નાખવામાં આવતી એટલે ૧૫૦ વરસ પહેલાં વીધવા પુન લગ્ન કાયદો બનાવવામાં આવેલ.

સતી રીવાજ, વીધવા પુનઃ લગ્ન કાયદો અને આભળછેટ બાબતમાં આટ આટલી માર ખાવા છંતા દંભી હીન્દુ સમાજ મીયાભાઈની ટંગળી ઉંચી રાખવા હજી ગીતા રટણ દ્વારા હવાતીયા મારે છે.

અભીવ્યક્તીમાં અક્ષરાંકન, પ્રુફ વાંચનમાં યોગદાન આપવા બદલ ગોવીન્દ મારુ અને ઉત્તમ ગજ્જરને અભીનંદન.

Wednesday, 14 March 2012

अमेरिकी साइट पर सोनिया की 'दौलत' के चर्चे

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/12242887.cms

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नई दिल्ली।।
अमेरिकी वेबसाइट ' बिजनेस इनसाइडर ' ने दुनिया के सबसे रईस राजनेताओं की लिस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चौथे नंबर पर रखा है। इस लिस्ट में हरियाणा की विधायक और जिंदल समूह की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल का नाम भी है। साइट के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष की संपत्ति 2 से 19 अरब डॉलर यानी 10 हजार से 45 हजार करोड़ के बीच हो सकती है।

दरअसल, सबसे पहले यह खबर जर्मनी के अखबार 'डी वेल्ट' में छपी थी। इस अखबार के वर्ल्ड्स लग्जरी गाइड सेक्शन में दुनिया के सबसे रईस 23 नेताओं की लिस्ट छापी गई थी। उसमें भी सोनिया गांधी चौथे स्थान पर हैं। ' बिजनेस इनसाइडर ' ने अपनी लिस्ट में सोर्स के रूप में वर्ल्ड्स लग्जरी गाइड का हवाला दिया है, जबकि सबसे नीचे लिखा गया है कि यह रिपोर्ट OpenSecrets.org, Forbes.com, Bloomberg.com, Wikipedia.org, Guardian.co.uk से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।

इस पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल नेटवर्किंग साइटों पर काफी चर्चा है। कुछ लोगों ने कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया न आने पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया की अपेक्षा इसलिए की जा रही है, क्योंकि सोनिया गांधी की ओर से घोषित की गई संपत्ति और लिस्ट में बताई गई संपत्ति में जमीन-आसमान का अंतर है। ऐसे में संभावना यह जताई जा रही है कि कांग्रेस पार्टी साइट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

लिस्ट में अहम नाम
1. अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अजीज शाह, सऊदी अरब
2. हसनल बोलखेह सुल्तान, ब्रुनेई
3. माइकल ब्लूमबर्ग मेयर, न्यूयॉर्क
4. सोनिया गांधी
6. व्लादीमिर पुतिन
7. सावित्री जिंदल
19. आसिफ अली जरदारी
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