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Wednesday, 16 July 2014

मजदूरों के हाथ काटने की घटना पर SC की तल्ख टिप्पणी

मजदूरों के हाथ काटने की घटना पर SC की तल्ख टिप्पणी


नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश में छह महीने पहले दो मजदूरों के हाथ काटने की खौफनाक घटना पर सुनवाई करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस तरह के देश में हम रहते हैं। ऐसी घटना किसी आदिम देश में भी नहीं होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर आंध्र प्रदेश सरकार से भी जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह इस जघन्य घटना पर क्या कार्रवाई कर रही है। पिछले साल दिसंबर में आंध्र प्रदेश में ठेकेदार ने ईंट-भट्टे पर काम करने वाले ओडिशा के दो प्रवासी मजदूरों दियालु और नीलांबर मांझी के दाहिने हाथ काट दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया में छपी खबरों का संज्ञान लेते हुए इस खौफनाक घटना का स्वत: संज्ञान लिया था।

तत्कालीन चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने इस साल जनवरी में मामले की सुनवाई करते हुए ओडिशा और आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किए थे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर फिर सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की।

इस दर्दनाक घटना से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने देश में ऐसे लोगों का शोषण और उन पर अत्याचार रोकने के लिए एक नीति तैयार करने पर जोर दिया। जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा को विस्तृत निर्देश देने से पहले दो मजबूरों की हथेलियां काटे जाने पर नाराजगी व्यक्त की।

जजों ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश सरकार को इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदमों की जानकारी देने का निर्देश देते हुए कहा, 'यह दिखावटी नहीं होना चाहिए। आपको हमें बताना होगा कि प्रवासी मजदूरों के मामलों में कानून के तहत कितने मामले दर्ज किए गए।'

कोर्ट को बताया गया कि पश्चिमी ओडिशा के छह जिलों कोरापुट, बोलंगीर, कालाहांडी, बारागढ़, नौपार्दा और मल्कानगिरि के गरीबी से जूझ रहे लोग इस तरह के शोषण के शिकार हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ईंट भट्टों पर काम करते हैं। 

उन्होंने पूछा, पैर काटें या हाथ?
दियालु ने बताया, 'उन्होंने हमसे पूछा कि तुम्हारा हाथ काटा जाया या पैर। हम उनके सामने गिड़गिड़ाते रहे। मैंने कहा कि हम उधार चुकाने के लिए 10 साल तक काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुना। पहले उन्होंने मेरे सामने नीलांबर मांझी का हाथ काटा और फिर मेरा।' वहीं नीलांबर मांझी ने बताया, 'मैंने उनसे कहा कि हम बहुत गरीब हैं। उनका पैसा तुरंत नहीं चुका सकते। लेकिन वह पैर या हाथ में से एक को छांटने के लिए कहते रहे। मैंने उन्हें कहा कि मेरा पैर बख्श दो और हाथ काट लो। हमारा हाथ काटने के बाद उन्होंने हमारे खून का अपने सिर पर टीका लगाया और वैन में बैठकर शराब पीने लगे।'

क्या था पूरा मामला
मजदूरों के हाथ काटने की यह घटना ओडिशा के कालाहांडी जिले के बेलपाड़ा गांव में एक जंगल के पास हुई। दोनों मजदूरों को उन्हें दी गई अडवांस रकम की उगाही के लिए वापस उनके घर ले जाया जा रहा था। यह रकम उन्हें काम पर लिए जाने के दौरान दी गई थी। इन मजदूरों ने छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में एक ईंट-भट्ठे पर काम करने से इनकार कर दिया था और इसलिए उन्हें वापस ले जाया जा रहा था।

वापसी के दौरान रास्ते में ठेकेदार और उसके साथियों ने शराब पी तथा दोनों मजदूरों के दाहिने हाथ काट दिए। ये दोनों मजदूर मजदूरों के उस समूह का हिस्सा थे, जिन्हें ठेकेदार ने आंध्र प्रदेश में ईंट भट्ठे में काम करने के लिए 14-14 हजार रुपये पर रखा था। लेकिन ठेकेदार ने उन सभी को जबरन छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक ईंट भट्ठे पर काम के लिए ले जाने का प्रयास किया, जिससे मजदूरों ने इनकार कर दिया। इनमें से दस निकल भागने में सफल रहे।


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